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Kapalbhati Pranayama: योगासन और प्राणायाम स्वस्थ्य रखने में मदद करते हैं। कपालभाति करने से शरीर को कई बड़े फायदे मिलते हैं। आइए जानते हैं इसके अभ्यास का तरीका।

Kapalbhati Pranayama: हमारे यहां हजारों सालों से योगासन किया जा रहा है जिसकी मदद से शरीर को स्वस्थ्य रखा जा सकता है। योगासन के साथ प्राणायाम करने से शरीर को बड़े लाभ मिलते हैं। प्राणायाम के कई प्रकार हैं और कपालभाति भी उनमें से एक है। कपालभाति का नियमित अभ्यास तनाव, चिंता कम करने में मदद करने के साथ ही कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी होता है। 

कपालभाति के फायदे

पाचन में सुधार: कपालभाति पाचन अंगों की मालिश करने में मदद करता है, जिससे पाचन क्रिया में सुधार होता है। यह कब्ज, अपच और गैस जैसी पाचन समस्याओं को दूर करने में भी मददगार हो सकता है।

वजन घटाने में सहायक: कपालभाति चयापचय को बढ़ाने में मदद करता है, जो वजन घटाने में सहायक हो सकता है। यह शरीर से अतिरिक्त वसा को कम करने में भी मदद कर सकता है।

तनाव और चिंता को कम करता है: कपालभाति मन को शांत करने और तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। यह मूड में सुधार और अवसाद से लड़ने में भी मददगार हो सकता है।

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श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाता है: कपालभाति फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन समस्याओं वाले लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: कपालभाति रक्त में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाने में मदद करता है, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

त्वचा के लिए फायदेमंद: कपालभाति रक्त प्रवाह को बढ़ाता है और त्वचा को पोषक तत्व प्रदान करता है, जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनती है।
एकाग्रता में सुधार करता है: कपालभाति मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है, जिससे एकाग्रता और स्मृति में सुधार होता है।

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कपालभाति करने की विधि

सीधा बैठें: सबसे पहले, आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं। आप कुर्सी पर या जमीन पर बैठ सकते हैं। अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और अपनी छाती को चौड़ा करें।

श्वास लें: धीरे-धीरे और गहरी सांस नाक से लें।

श्वास छोड़ें: अब, बलपूर्वक सांस नाक से छोड़ें। अपनी पेट की मांसपेशियों को अंदर की ओर खींचें और अपनी नाभि को अपनी रीढ़ की हड्डी की ओर खींचें। यह क्रिया आपके माथे को हिलाएगी, जिसके कारण इसे "कपालभाति" कहा जाता है।

श्वास लें और दोहराएं: धीरे-धीरे और गहरी सांस नाक से लें और फिर से बलपूर्वक सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को 10-15 बार दोहराएं।

अभ्यास बढ़ाएं: धीरे-धीरे, आप धीरे-धीरे श्वास छोड़ने और सांस लेने की गति और सांसों की संख्या बढ़ा सकते हैं।

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