Gardening Tips: गर्मी के सीजन में गार्डन को हरा-भरा रखना मेहनत का काम होता है। ऐसे में कुछ टिप्स को फॉलो कर इसे आसान बनाया जा सकता है।

Gardening Tips: फरवरी-मार्च आते ही मौसम का मिज़ाज बदलने लगता है और गर्मी की आहट साफ सुनाई देने लगती है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपका गार्डन पूरे सीजन हरा-भरा और खिलता हुआ दिखे, तो अभी से तैयारी शुरू करना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग तेज धूप पड़ने के बाद पौधों की देखभाल के बारे में सोचते हैं, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।

गार्डनिंग एक्सपर्ट्स मानते हैं कि गर्मी शुरू होने से पहले कुछ जरूरी बदलाव कर लिए जाएं, तो पौधों को हीट स्ट्रेस, सूखी मिट्टी और कीटों से बचाया जा सकता है। आइए जानते हैं वे 5 अहम बदलाव, जो आपकी बगिया को पूरे सीजन ताजगी से भर देंगे।

गार्डनिंग से जुड़ी 5 बातें रखें ध्यान

मिट्टी की गुड़ाई और पोषण बढ़ाएं
सर्दियों के बाद मिट्टी सख्त हो जाती है। गर्मी से पहले मिट्टी की हल्की गुड़ाई कर लें, ताकि उसमें हवा का संचार बेहतर हो सके। साथ ही गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट या ऑर्गेनिक खाद मिलाएं। इससे पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलेंगे और उनकी जड़ें मजबूत होंगी।

मल्चिंग जरूर करें
गर्मी में मिट्टी की नमी जल्दी खत्म हो जाती है। इसे बचाने के लिए पौधों के आसपास सूखी पत्तियां, भूसा या नारियल की भूसी बिछा दें। इसे मल्चिंग कहते हैं। इससे पानी की बचत होगी और मिट्टी ठंडी बनी रहेगी। साथ ही खरपतवार भी कम उगेंगे।

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सही समय पर सिंचाई की योजना बनाएं
गर्मी में दोपहर के समय पानी देना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि तेज धूप में पानी जल्दी वाष्पित हो जाता है। सुबह जल्दी या शाम को पानी देना बेहतर रहता है। अगर संभव हो तो ड्रिप इरिगेशन सिस्टम अपनाएं, जिससे पानी सीधे जड़ों तक पहुंचे।

छायादार व्यवस्था करें
कुछ पौधे तेज धूप सहन नहीं कर पाते। ऐसे में ग्रीन नेट या अस्थायी शेड लगाना फायदेमंद रहता है। खासकर नर्सरी के नए पौधों और गमलों में लगे संवेदनशील पौधों को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत होती है।

कीट और रोग नियंत्रण की तैयारी
गर्मी में कीटों का हमला बढ़ जाता है। नीम का तेल या ऑर्गेनिक स्प्रे का इस्तेमाल कर पौधों को पहले से सुरक्षित करें। नियमित रूप से पत्तियों की जांच करें, ताकि बीमारी की शुरुआत में ही उसे रोका जा सके।

अतिरिक्त सुझाव

  • सूखे और पीले पत्तों की समय-समय पर छंटाई करें।
  • गर्मी में उपयुक्त पौधों जैसे तुलसी, गुड़हल और मनी प्लांट लगाएं।
  • गमलों की ड्रेनेज व्यवस्था ठीक रखें, ताकि पानी जमा न हो।

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