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Knowledge News: क्या होती है आचार संहिता, विस्तार से जानिए इसके नियम

साल की शुरुआत के साथ ही देश के पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज चुका है। 10 फरवरी को उत्तर प्रदेश में पहले चरण की शुरुआत के साथ देश में चुनाव शुरु हो जाएंगे। 8 जनवरी को चुनावों की घोषणा के बाद से ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में आचार संहिता लागू हो गई है। तो अपनी इस स्टोरी में हम आपको आचार संहिता के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Knowledge News: क्या होती है आचार संहिता, विस्तार से जानिए इसके नियम
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साल की शुरुआत के साथ ही देश के पांच राज्यों में (Assembly Election 2022) चुनावी बिगुल बज चुका है। इस साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड (Uttarakhand), पंजाब (Punjab), गोवा (Goa) और मणिपुर (Manipur) में चुनाव होने वाले हैं। 10 फरवरी को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में पहले चरण की शुरुआत के साथ देश में चुनाव शुरु हो जाएंगे। चुनाव आयोग ने 8 जनवरी को देश में होनें वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) को लेकर के घोषणा कर दी है। कुल 7 चरणों में होने वाले चुनाव 7 मार्च तक चलेंगे। जिसका पहला चरण 10 फरवरी, दूसरा चरण 14 फरवरी, तीसरा चरण 20 फरवरी, चौथे चरण 23 फरवरी, पांचवा 27 फरवरी, छठा 3 मार्च और सातवा चरण 7 मार्च को पूरा होगा। इसके साथ ही 10 मार्च को चुनावी नतीजों को घोषित भी कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग द्वारा चुनावों की घोषणा हो जाने के बाद भारत में तुरंत बाद ही आचार संहिता (Code Of Conduct) लागू कर दी जाती है। तो आज की इस स्टोरी में हम आपके आचार संहिता से जुड़े सवालों का जवाब देंगे...

क्या होती है आचार संहिता

भारत के चुनाव आयोग की आदर्श आचार संहिता भारत के चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के चुनाव के दौरान मुख्य रूप से भाषणों, मतदान दिवस, मतदान केंद्रों, विभागों, चुनाव घोषणापत्र, जुलूस और सामान्य आचरण के संबंध में जारी दिशानिर्देशों का एक समूह है। आचार संहिता को पॉलिटिकल पार्टियों की सहमति से विकसित किया गया है। इसके साथ ही पार्टियों ने संहिता में निहित सिद्धांतों को अपने अक्षर और भावना में पालन करने की सहमति दी है।

कब और क्यों होती है लागू

चुनाव आयोग द्वारा चुनावों की घोषणा के तुरंत बाद ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है और पूरे चुनावी प्रकरण के खत्म होनें तक चलती है। इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की आवश्यकता के कारण लागू किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य इस बात को सुनिश्चित करना है कि केंद्र और राज्यों की रूलिंग पार्टी अपनी पावर का नाजायज फायदा उठाते हुए चुनाव में अपने लाभ के लिए काम न करें। इसके साथ ही इसे उन प्रथाओं के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें आदर्श आचार संहिता के तहक भ्रष्ट माना गया है। जैसे कि कोई भी नेता अपनी ऑपोजिट पार्टी के खिलाफ हेट फैलाने वाले भाषण नहीं दे पाएगा, इसके साथ ही वोटर को लुभाने के लिए कोई नए वादे भी नहीं करेगा।

ये हैं आचार संहिता के नियम

  • आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार कोई भी नए प्रोजेक्ट का आधार नहीं रख सकती।
  • गवर्नमेंट बॉडीज चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकती।
  • चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और उनके लिए प्रचार करने वाले लोगों को अपने ऑपोजिट कैंडिडेट के निजी जीवन का सम्मान करना चाहिए और उनके घरों के सामने रोड शो या प्रदर्शन करके उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। आचार सहिंता उम्मीदवारों को इसे दूर रखने के लिए कहता है।
  • चुनाव प्रचार रैलियों और रोड शो से सड़क यातायात बाधित नहीं होना चाहिए।
  • कैंडिडेट्स को वोटर्स को शराब बांटने से मना किया गया है। भारत में चुनाव के दौरान वोटर्स को लुभाने के लिए शराब बांटते ज्यादातर देखा गया है। इस पर चुनाव आयोग अपनी कड़ी नजर रखता है।
  • आचार संहिता के दौरान सरकार या सत्ताधारी पार्टी के नेता सड़कों के निर्माण, पेयजल सुविधाओं के प्रावधान जैसे नए कल्याणकारी कार्यक्रमों को शुरू करने की मनाही होती है। इसके साथ ही सत्ताधारी पार्टी के नेता किसी भी तरह के रिबन कटिंग के लिए नहीं जा सकते।
  • कोड निर्देश देता है कि सार्वजनिक स्थान जैसे बैठक मैदान, हेलीपैड, सरकारी गेस्ट हाउस और बंगलो को चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के बीच समान रूप से शेयर किया जाना चाहिए। इन सार्वजनिक स्थानों पर कुछ उम्मीदवारों की मोनोपोली नहीं होना चाहिए।
  • वोटिंग के दिन सभी पार्टी के कैंडिडेट्स को एक व्यवस्थित मतदान प्रक्रिया के लिए मतदान केंद्रों पर तैनात पोल ड्यूटी अधिकारियों का पूरी तरह से सहयोग करना चाहिए। मतदान के दिन कोई भी कैंडिडेट मतदान केंद्र या फिर उसके आसपास अपने चुनाव चिन्ह का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। किसी को भी चुनाव आयोग के वैलिड पास के बिना बूथ पर प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।
  • पोलिंग बूथ पर ऐसे मतदान पर्यवेक्षक होंगे जिन्हें चुनाव में हो रही किसी भी गड़बड़ी सूचना दी जा सकती है।
  • सत्ताधारी दल को अपनी सत्ता की सीट का इस्तेमाल प्रचार के लिए नहीं करना चाहिए।
  • सत्तारूढ़ दल के मंत्री अधिकारियों की कोई ऐड- एचओसी अपॉ़इंटमेंट नहीं कर सकते, जो मतदाताओं को रूलिंग पार्टी के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रभावित कर सकती है।
  • अपने चुनाव प्रचार के दौरान लाउडस्पीकर का उपयोग करने से पहले, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को स्थानीय अधिकारियों से अनुमति या लाइसेंस प्राप्त करना होता है। इसके साथ ही कैंडिडेट्स को चुनावी रैलियों के आयोजन के लिए स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए ताकि पुलिस आधिकारी आवश्यक सुरक्षा का इंतेजाम कर सकें।

कोरोना के मद्देनजर किए गए बदलाव

इसके साथ ही कोरोना महामारी को मद्देनजर रखते हुए चुनाव आयोग ने स्पेशल गाइडलाइन्स जारी की हैं, जिनके तहत वोटर्स को पोस्टल बैलेट के साथ साथ डोर स्टेप वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। जहां कोरोना पॉजिटिव के लिए पोस्टल बैलेट और 80 प्लस सीनियर सिटिजन और दिव्यांगों को डोर स्टेप वोटिंग की सुविधा दी गई है। कोविड को ध्यान में रखते हुए 16% पोलिंग बूथ बढ़ाए गए हैं जिसके अंतर्गत 2.15 लाख से ज्यादा मतदान केंद्र बने हैं। एक मतदान केंद्र में वोटर्स की मैक्सिमम संख्या 1500 को घटाकर 1250 कर दिया गया है। इसके साथ ही कैंडिडेट्स को 15 जनवरी तक जनसभा करने की अनुमति नहीं हैं। कैंडिडेट्स वर्चुएल रैली और डोर टू डोर प्रचार कर सकते हैं, वहीं डोर टू डोर प्रचार में भी केवल 5 लोगों को ही शामिल होनें की अनुमति है। 15 जनवरी के बाद कोविड हालातों का रिव्यू किया जाएगा और इसके बाद ही जनसभा और रैलियों पर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में अगर इसकी इजाजत दी जाती है तो सभी को कोविड नियमों का पालन करना होगा। इस दौरान कोरोना नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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