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कश्मीर में 22 सोशल नेटवर्किंग साइट एक महीने के लिए हुई बैन

कश्मीर में आतंकी संगठन सोशल मीडिया के द्वारा अफवाहें फैलाकर हिंसा भड़काने का काम करते थे।

कश्मीर में 22 सोशल नेटवर्किंग साइट एक महीने के लिए हुई बैन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की मुलाकात के बाद कश्मीर में हिंसा पर काबू पाने के प्रयास तेज हो गए हैं।

महबूबा ने एक दिन पहले यूनिफाइड कमांड की बैठक में सुरक्षा बलों को संयम की नसीहत दी थी और अब सरकार ने अफवाहों पर ब्रेक लगाने के लिए कश्मीर में 22 सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक माह के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।

गृह विभाग ने आदेश जारी कर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों को सोशल मीडिया की साइट पर रोक लगाने को कहा है। उपद्रवी तत्व सोशल मीडिया के सहारे अफवाहें फैलाकर हिंसा भड़का रहे थे। इस आदेश के बाद अब कश्मीर में यू ट्यूब पर भी कुछ अपलोड नहीं हो सकेगा।

गौरतलब है कि आतंकी संगठनों, कुछ सियासी कार्यकर्ता, पत्थरबाजों और उपद्रवियों द्वारा कई वीडियो वायरल किए जा रहे थे। इस कारण उपद्रव, पत्थरबाजी और हिंसा पर अंकुश लाना मुश्किल हो रहा था।

कश्मीर में सोशल मीडिया पर होने वाले देश विरोधी और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ दुष्प्रचार पर गृह विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए इस आशय का फैसला लिया है। अब 22 नेटवर्किंग साइट पर उपभोक्ता मैसेज के साथ कुछ भी अपलोड नहीं कर सकेंगे।

इस आदेश से पहले फेसबुक और व्हाट्सएप पर भारतीय सेना के खिलाफ लगातार वीडियो अपलोड हो रहे थे। आतंकियों के वीडियो तक अपलोड हो रहे थे। गृह विभाग ने इंडियन टेलीग्राफ एक्ट और सूचना तकनीकी एक्ट के तहत प्रतिबंध लगाया है।

सरकार के फैसले के बाद फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, क्यू क्यू, वीचैट, क्यूजोन, टूंबिर, गूगल प्लस, बैडू, स्काइप, लाइन, वायवर, स्नैपचैट, पिंटरेस्ट, टेलीग्राम, रेडिट, स्नैपफिश, यू ट्यूब अपलोड, वाइन, जैंगा, बजनेट और फ्लिकर साइटों पर रोक लग गई है।

इंस्टेट मैसेजिंग सर्विस, फेसबुक और ट्विटर भी बंद

मोबाइल कंपनियों पर इंस्टेट मैसेजिंग सर्विस भी बंद रहेगी। आदेश में कहा गया कि कश्मीर में फेसबुक और ट्विटर का भी गलत उपयोग हो रहा था। शरारती तत्व इसके दुरुपयोग से जन सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे थे। सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा था।

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