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Health Tips: भृंगराज का पौधा, इंसान को ज्ञात सबसे पुरानी और उपयोगी जड़ी-बूटियों में से एक है। आयुर्वेद में इसके अनेक उपयोग दर्ज हैं। सबसे ज्यादा तो यह जड़-बूटी ठंडे भृंगराज तेल के लिए जानी जाती है,जो सिरदर्द भगाने में रामबाण की तरह होता है। भृंगराज उन गिनी-चुनी हर्बल में से भी एक है, जिसका हर हिस्सा औषधीय दृष्टि से उपयोगी होता है। इसलिए भृंगराज को बहुत लाभकारी जड़ी-बूटियों के समूह में रखते हैं। इसके इस्तेमाल से लिवर और आंतों के स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार होता है।

कई नामों से लोकप्रिय: भृंगराज को वनस्पतिशास्त्र में एक्लिप्टा अल्बा कहते हैं। इसके अन्य नामों में भांगड़ा, थिसल्स, माका, अंगारक, बंगरा, केसुती, बाबरी आदि हैं। इसे अलग अलग क्षेत्रों की बोली भाषाओं में अलग अलग नाम से पुकारा जाता है। जैसे उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आमतौर पर इसे घमिरा कहते हैं, इसमें तीखी गंध होती है और ये उस जगह बारिश के दिनों में अपने आप उग आता है, जहां नमी होती है। इंसानी बस्तियों के इर्द-गिर्द ही ज्यादा और अपने आप उगता है। 

गर्मी में विशेष लाभकारी: जिस तरह से पुदीने की पत्तियों और इसके अर्क यानी पत्तियों के रस को गर्मियों में पेट संबंधी समस्याओं के लिए रामबाण समझा जाता है। उसी तरह के गुण भृंगराज की पत्तियों में भी होते हैं। भृंगराज की तासीर ठंडी होती है, इसलिए अगर गर्मी के मौसम में पेट संबंधी कोई भी समस्या मसलन अपच, गैस बनना और कब्ज से पीड़ित हों तो बहुत आसानी से इसके इस्तेमाल से इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। आयुर्वेद के मुताबिक अगर गर्मियों में भृंगराज का तीन महीने तक शर्बत पीया जाए, तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
 
बालों के लिए वरदान: भृंगराज पौधे की पत्तियों में विशेष गुण होते हैं। जिन लोगों के सिर के बाल झड़ रहे हों, वो लोग अगर भृंगराज के पौधे की हरी पत्तियों को पीसकर अपने सिर में लगा लें तो नए बाल भले न उगें, लेकिन बाल झड़ने तुरंत बंद हो जाते हैं। भृंगराज के अलावा इसे केशराज के नाम से भी जाना जाता है। झड़ते बालों को रोकने ही नहीं बल्कि उन्हें काला करने के बारे में भी इसको ख्याति हासिल है। 

होते हैं कई गुण: भृंगराज जड़ी-बूटी अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। इसके अंदर अनेक प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जैसे- फ्लेवोनॉयड और एल्कलॉइड। ये एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने का काम करते हैं और विभिन्न प्रकार के हानिकारक चीजों से लिवर की रक्षा करते हैं। लिवर की रक्षा के लिए भृंगराज बहुत उपयोगी माना जाता है। इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण भी होते हैं, जो लिवर को हैपेटाइटिस सी जैसे वायरल संक्रमण से बचाता है। 

भृंगराज शरीर में होने वाली सूजन को असरदार ढंग से रोकता है और इसके अंदर जो पोषक तत्व होते हैं, उन्हीं से बालों की गुणवत्ता और उनकी लंबाई में इजाफा होता है। त्वचा के कटने, छीलने या घाव आदि हो जाने पर भी यह असरदार तरीके से काम करता है। यह सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में सहायक होता है। यह कफ और वात विकार को भी कम करता है। लिवर के साथ किडनी के स्वास्थ्य के लिए भी यह बेहद उपयोगी है। फैटी लिवर और पीलिया जैसी समस्याओं में यह बेहद असरकारी होता है। त्वचा के संक्रमण से भी यह बचाता है।

एक्सपर्ट की राय से करें यूज: जहां तक इसके उपयोग का तरीका है, तो इसे तीन तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी पत्तियों का पेस्ट बनाकर और उसमें तेल मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके पावडर में भी तेल मिलाकर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है या फिर बाजार से मिलने वाले भृंगराज हर्बल के विभिन्न प्रोडक्ट्स जैसे कैप्सूल आदि का सेवन किया जा सकता है। इसके अर्क या रस का भी इस्तेमाल होता है। 

कई मामलों में यह शरबत की तरह पीने में भी इस्तेमाल होता है, लेकिन गुड़ या चीनी की जगह इसमें शहद डालने की जरूरत होती है। 2 से 3 ग्राम से ज्यादा भृंगराज का पावडर नहीं इस्तेमाल करना चाहिए और दिन में खाना खाने के बाद अधिकतम इसे दो बार इस्तेमाल किया जा सकता है। भृंगराज का उपयोग अपने मन से कभी ना करें। हमेशा किसी योग्य चिकित्सक या आयुर्वेद एक्सपर्ट की सलाह और देख-रेख में ही करना चाहिए, वरना इसके नुकसान भी हो सकते हैं। 

हर्बल जोन
रेखा देशराज