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Exclusive:कांग्रेस के MP प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। इस बीच कांग्रेस से कार्यकर्ताओं, नेताओं का जाना बदस्तूर जारी है। ‘हरिभूमि’ और ‘आईएनएच’ न्यूज चैनल के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने उनसे मौजूदा परिस्थितियों के बारे में बात की। विस्तार से पढ़ें...

Exclusive:जीतू पटवारी कांग्रेस के भविष्य के लिए संभावनाशील और युवा व्यक्तित्व हैं। उन्हें कुछ समय पहले ही कमलनाथ के स्थान पर प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लोकसभा चुनाव उनके नेतृत्व में कांग्रेस लड़ रही है और इसी दौर में कांग्रेसी भी पार्टी से निकल जाते रहे हैं, ऐसी कठिन परिस्थितियों में वे कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन कर रहे हैं। वे कार्यकर्ताओं और जनता में नई उम्मीद जगाने का काम कर रहे हैं। पेश है जीतू पटवारी से ‘हरिभूमि’ और ‘आईएनएच’ न्यूज चैनल के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी से एक्सक्लूसिव बातचीत के प्रमुख अंश। 

सवाल: कमलनाथ जैसे अनुभवी को अपदस्थ कर हाईकमान ने आपको प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी है, कितने तनाव और दबाव में काम कर रहे हैं ?
जवाब: नई संभावनाओं के साथ मैं पार्टी के लिए काम कर रहा हूं। आज देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचला जा रहा है। यह समय संघर्ष का है। ऐसे में हमारा दायित्व है लोकतंत्र की जो खूबसूरती है, उस पर कुठाराघात न हो, इसके लिए हम संघर्ष रहे हैं। आज लोकतंत्र बचाना जरूरी हो गया है।

सत्ता भी कार्य करने के लिए जरूरी होती है, पर विपक्ष भी देश के लिए जरूरी है। मैं मानता हूं कि जनता ने हमें विपक्ष की भूमिका हमें दी है, उसे हम बखूबी निभा रहे हैं। जहां तक लोकसभा चुनाव ही बात है तो कांग्रेस मप्र में 50 प्रतिशत सीटें जीतेगी। विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 2700 क्विंटल गेहूं खरीदी का बोला था, तो इस पर जनता ने भरोसा किया, लेकिन अब नहीं खरीद रहे। अब किसान गुस्से में है, इसलिए, वह भाजपा से दूर हो गया है। उसका असर प्रदेश में दिख रहा है। ऐसी कई संभावनाएं हैं, जिनके दम पर हम अच्छी सीटें लोकसभा में जीतेंगे। 

सवाल: कांग्रेस के कार्यकर्ता भाजपा में क्यों भागे जा रहे हैं, उन्हें आप रोकते हैं या नहीं ?
जवाब: यह सही है कि कांग्रेस के लोग भाजपा में जा रहे हैं। ऐसे में मेरा दायित्व है कि उनको मनाऊं और रोकूं, लेकिन, भाजपा हमारे लोगों पर विभिन्न एजेंसियों का डर दिखाकर तोड़ रही है। भाजपा तानाशाही कर रही है। लोकतंत्रविहीन देश कैसे होगा, इसके लिए भाजपा काम कर रही है। एक हमारे जिला पंचायत अध्यक्ष से भाजपाइयों ने कहा कि आप भाजपा में आओ, वरना हम अविश्वास से आपको पद से हटा देंगे।

ऐसे ही हमारे महापौर को बोला और विधायक को भी। एक का रेत का काम था। दूसरे का क्रेसर का काम है, उस पर भी दबाव बनाया। तीसरे का बसों का काम है, उसे भी इसी तरीके से भाजपा ने घेरा। इस आधार पर डरा-धमका के लोगों को तोड़ा जा रहा है। कुछ 800 के करीब कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा में गए, जिनमें से 400 लोगों से मेरी बात हुई। उन्होंने कहा कि हमें तकलीफ बहुत दी जा रही है। जब समय आएगा तो फिर आ जाएंगे।  लेकिन हमारा दृढ़-निश्चय है, जिसने हमें आज धोखा दिया, इनके लिए जब तक मैं अध्यक्ष रहूंगा, तब तक पार्टी के दरवाजे बंद रहेंगे।  

सवाल: वक्त गुजरने के साथ कांग्रेसी इतने डर क्यों रहे हैं ? 
जवाब:  ये प्राकृतिक है कि समय बदलने पर कुछ लोग डरने लगते हैं। वेे आज भी कांग्रेस को मानते हैं, लेकिन भविष्य के डर से लोग ऐसा कदम उठा रहे हैं। लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ना पड़ेगा, तो लड़ेंगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके साथी विधायक पार्टी छोड़कर गए। 13 जिलाध्यक्ष और गए। ऐसे पिछले 5 साल में 65 बड़े नेता पार्टी को धोखा देकर भाजपा में गए हैं। हमने इनके जाने का आंकलन किया कि क्यों छोड़कर गए? क्या भविष्य की संभावनाओं को देखकर गए। धन कमाने गए या लालच के कारण गए।

उनका राजनैतिक रूप से व्यक्तितत्व नहीं बचा। इसलिए मैं हंसता हूं कि एक दिन की माला है। दूसरे दिन तो चेहरा दिखाते हैं कि फोटो में आ जाऊं। मुझे पता है कि कार्यकर्ता और विचारधारा अपनी जगह खड़ी रहेगी। व्यक्ति इधर-उधर होंगे, विचलित भी होंगे। डर किसी प्रकार का नहीं, चिंता जरूर है। क्योंकि मुझे पता है कि मेरी पार्टी का लक्ष्य क्या है। मुझे पता है कि किन संभावनाओं के लिए मुझे यहां बैठाया गया है। मुझे पता है कि इन परिस्थितियों से निपटना है और पार्टी को नंबर 1 पर लाना है।  मेरी इच्छा शक्ति मजबूत है।     

सवाल: सुरेश पचौरी बता रहे हैं कि मैं सनातनी हूं, कांग्रेस इसकी विरोधी पार्टी है, इसलिए मैं भाजपा में चला गया, क्या यह सही है? 
जवाब: सुरेश पचौरी या अन्य प्राण-प्रतिष्ठा से दुखी होकर पार्टी छोड़कर भाजपा में गए, वे अभी तक राम मंदिर नहीं गए। भगवान राम के दर्शन करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने किसी को नहीं रोका, न रोकेगी। कोर्ट के आदेश पर भगवान राम मंदिर के दरवाजे पूर्व पीएम राजीव गांधी ने खुलवाए थे। पार्टी ने एक बार नहीं, हजार बार कहा कि कोर्ट जो आदेश देगा, वह सर्वमान्य होगा।  संविधान देश के लिए महत्वपूर्ण है। इतने सालों बाद निर्णय आया। संयोग है कि जब कोर्ट के आदेश पर पहली बार दरवाजा खुला था, तब कांग्रेस के नेतृत्व वाली राजीव गांधी सरकार थी। संयोग है कि अभी जब फैसला आया तो भाजपा की सरकार है।

यह संयोग ही कहा जाएगा। रही बात दर्शन करने की तो भाजपा कहे कि जब हम कहें तब दर्शन करने आओ या जाओ, हम कहें यहां बैठो-उठो। यह गुलामी का प्रतीक है, यह आस्था का विषय कभी नहीं हो सकता है। भगवान राम हमारी आस्था हैं और रहेंगे। हम और हमारी पार्टी कहती है कि जो जिस धर्म का है वह उस पद्धति के अनुसार जीए। इस देश में यह मौलिक अधिकार है। जिसको जब भगवान बुलाएगा, तब वह जाएगा। भाजपा के कहने पर थोड़ी जाएंगे। हिंदू धर्म में यही सबसे बड़ी मान्यता है। भाजपा अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाती है या दुष्प्रचार करती है। पार्टी आस्थाओं को कभी नहीं रोकती।  

सवाल: राहुल गांधी को भगवान राम दर्शन के लिए क्यों नहीं बुलाते?
जवाब: धर्मग्रंथों में मान्यता है कि रात में भगवान राम अयोध्या में रहते हैं और दिन में ओरछा में। राहुल गांधी ओरछा गए थे। जिस दिन प्राण-प्रतिष्ठा हो रही थी, उस दिन हम ओरछा में कीर्तन कर रहे थे। उस दिन शिवराज सिंह भी वहीं मौजूद थे। वह भी अयोध्या क्यों नहीं गए। उनसे भी सवाल पूछा जाना चाहिए कि आप उस दिन अयाेध्या क्यों नहीं गए? राम मंदिर समारोह के बाद देश की राष्ट्रपति से संबोधन क्यों नहीं कराया, पीएम मोदी से ही क्यों? धर्मग्रंथों में धर्माचार्यों का प्रमुख स्थान मिला है, लेकिन उन्हें क्यों नहीं बुलाया। जबकि हमें इन्हीं मनीषियों ने ही बताया कि भगवान राम कण-कण में हैं और उन्हीं की उपेक्षा की गई। भगवान राम जब जिनको आदेश करेंगे, वो वहां जाएंगे, चाहे राहुल गांधी हों, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी या अन्य हों।     

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