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Cyber Crime : सावधान ! कहीं बैंक खाता न खाली कर दे बेरोजगार भत्ता योजना, जाने क्यों

प्रधानमंत्री रोजगार भत्ता के नाम पर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा फर्जी मैसेज।यदि आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आया है तो सावधान रहें। रुपयों की चाह में इस लिंक पर क्लिक करना भारी पड़ सकता है।

Cyber Crime : सावधान ! कहीं बैंक खाता न खाली कर दे बेरोजगार भत्ता योजना, जाने क्यों
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व्हाट्सएप पर वायरल फर्जी मैसेज।

बहादुरगढ़। इन दिनों सोशल मीडिया (social media) पर प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना के तहत 3500 रुपये दिए जाने का मैसेज (लिंक) खूब वायरल हो रहा है। यदि आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आया है तो सावधान रहें। रुपयों की चाह में इस लिंक (Link) पर क्लिक करना भारी पड़ सकता है। खाता खाली हो सकता है या फिर मोबाइल(mobile) में मौजूद निजी डाटा भी लीक हो सकता है।

दरअसल, लोग अपने जाल में फंसाने के लिए इन्होंने एक और नई तरकीब निकाली है। लाकडाउन के चलते लोगों के काम छूट रहे हैं। बेरोजगारी भी बढ़ रही है। साइबर ठग भी लॉकडाउन में पूरी तरह से सक्रिय हैं। बेरोजगार युवाओं को बेरोजगार भत्ता योजना-2020 नाम (Unemployment Allowance Scheme - 2020) से मैसेज जमकर वायरल हो रहा है। लोग भी बिना जानकारी के इसे अंधाधुंध शेयर कर रहे हैं। इस मैसेज में लिखा है कि योजना के तहत रजिस्ट्रेशन कराएं। बेरोजगार युवाओं को 3500 रुपये प्रतिमाह भत्ता दिया जाएगा। पंजीकरण नि़:शुल्क, योग्यता दसवीं पास और आयु 18 से 40 निर्धारित होना बताया है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 मई लिखी है। साथ ही एक लिंक भी दिया है, जिसे क्लिक करने के बाद रजिस्ट्रेशन करने को कहा जाता है।

शातिर लोगों को उलझा रहे हैं

लिंक पर क्लिक करते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चित्र के साथ योजना के बारे में दर्शाता एक पेज खुलता है। नीचे फार्म दिया है, जिसमें नाम, पता उम्र आदि पूछे गए हैं। इसके अलावा तीन आसान प्रश्न पूछे जाते हैं। सवाल के जवाब देने के बाद एक और नया पेज खुलता है, जिसमें पात्र होेने की मुबारकबाद दी जाती है। इसके बाद पात्र सूचि में अपना नाम दर्ज कराने के लिए पांच लोगों को यह मैसेज ड्टोज अपना पंजीकरण क्रमांक प्राप्त करने को कहा गया है। जब पांच लोगों को मैसेज भेजते हैं तो 13 नंबर का पंजीकरण मिलता है। पंजीकरण के बाद आपको मोबाइल या ईमेल वेरिफकेशन को कहा जाता है। वेरिफिकेशन के बाद एक यू-ट्यूब पर पेज खुलता है, फिर पता लगता है कि आपके साथ मजाक हुआ है। यह केवल मजाक नहीं बल्कि शातिरों द्वारा लोगों को उलझाने का तरीका है।

ये जो भत्ते संबंधित लिंक भेजे जा रहे हैं, बिलकुल फर्जी है: साइबर एक्सपर्ट

साइबर एक्सपर्ट भूपेश लाठर ने बताया कि सरकारी विभाग की वेबसाइट के आखिर में एनआईसी डॉट इन होता है, जबकि डॉट कॉम कॉमर्शियल साइट पर इस्तेमाल होता है। ये जो भत्ते संबंधित ब्लॉग लिंक भेजे जा रहे हैं, बिलकुल फर्जी हैं। इसे भरने की प्रक्रिया में कई मिनट लगते हैं और इतना समय साइबर ठगों के लिए बहुत होता है। आपसे खुद ही डाटा लेते हैं और आपके मोबाइल में पहुंचकर डाटा चुरा लेते हैं। यह डाटा आपका निजी या फिर बैंक संबंधी भी हो सकता है। लोग जागरूक रहें और किसी भी तरह के लिंक पर बगैर जानकारी के क्लिक न करें। उधर, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) भी इसे फर्जी घोषित कर चुकी है।



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