Cannes 2025: कान्स में चमकी सत्यजीत रे की 'अरण्येर दिन रात्रि', वेस एंडरसन, शर्मिला टैगोर और सिमी गरेवाल ने बिखेरा जलवा

Cannes 2025: कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 के क्लासिक्स सेक्शन में भारतीय सिनेमा की महान धरोहर, सत्यजीत रे की 1970 की फिल्म 'अरण्येर दिन रात्रि' की भव्य स्क्रीनिंग हुई। इस खास मौके पर फिल्म की दो प्रमुख अदाकाराएं शर्मिला टैगोर और सिमी गरेवाल भी रेड कार्पेट पर नज़र आईं। उनके साथ मौजूद थे हॉलीवुड के चर्चित फिल्ममेकर और रे के लंबे समय से प्रशंसक, वेस एंडरसन।
Veteran actors Sharmila Tagore and Simi Garewal attended the screening of Aranyer Din ratri, directed by the legendary Oscar winning director Satyajit Ray at the 78th iconic annual Cannes Film Festival. Aranyer Dinratri is being screened under the Cannes classic section. pic.twitter.com/jHbRLkXwQ2
— Sourav || সৌরভ (@Sourav_3294) May 20, 2025
एंडरसन ने की सत्यजीत रे के सिनेमा की तारीफ
स्क्रीनिंग से पहले वेस एंडरसन ने व्यक्तिगत रूप से इस फिल्म का परिचय दिया और सत्यजीत रे के सिनेमा की प्रशंसा करते हुए कहा, "रे द्वारा हस्ताक्षरित कोई भी चीज़ संजोने लायक है; लेकिन 'Days and Nights in the Forest' एक दुर्लभ रत्न है। जाति, लिंग, आधुनिकता और आत्म-खोज के विषयों पर इतनी संवेदनशीलता से बनी यह फिल्म आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।"
रेस्टोरेशन के पीछे छह साल की मेहनत
इस फिल्म का 4K डिजिटल रेस्टोरेशन The Film Heritage Foundation, The Film Foundation’s World Cinema Project, L’Immagine Ritrovata, Janus Films और Criterion Collection के सहयोग से किया गया, जिसकी फंडिंग Golden Globe Foundation द्वारा दी गई। रेस्टोरेशन प्रक्रिया छह साल तक चली, जिसका नेतृत्व खुद वेस एंडरसन ने किया।
शर्मिला और सिमी की मौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र
शर्मिला टैगोर हरे रंग की साड़ी में अपनी बेटी सबा अली खान के साथ रेड कार्पेट पर नज़र आईं, वहीं सिमी गरेवाल अपने सिग्नेचर सफेद गाउन में ग्लैमरस दिखीं। सिमी ने फिल्म में एक आदिवासी संथाल लड़की ‘दुली’ की भूमिका निभाई थी, जबकि शर्मिला ने शहरी और आत्मविश्लेषी महिला ‘अपर्णा’ का किरदार निभाया था।
क्या है फिल्म की कहानी
'अरण्येर दिन रात्रि' चार शहरी पुरुषों की कहानी है, जो झारखंड के पलामू के जंगलों में छुट्टियां मनाने जाते हैं, लेकिन यह यात्रा उनके लिए आत्म-मंथन और सामाजिक टकराव की ओर बदल जाती है। फिल्म आधुनिकता, वर्ग, जाति और लिंग के टकराव जैसे विषयों को बेहद संजीदगी से छूती है।
काजल सोम
