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मेरी हर फिल्म पर पत्नी जी अपनी राय जरूर देती हैं: मनोज बाजपेयी

मनोज बाजपेयी फिल्म ‘सात उचक्के’ में कॉमिक अंदाज में नजर आएंगे।

मेरी हर फिल्म पर पत्नी जी अपनी राय जरूर देती हैं: मनोज बाजपेयी
मुंबई. बॉलीवुड के मंझे हुए एक्टर्स में गिने जाते हैं मनोज बाजपेयी। इस साल अब तक मनोज बाजपेयी की तीन फिल्में ‘अलीगढ़’, ‘ट्रैफिक’ , ‘बुधिया सिंह’ और दो शॉर्ट फिल्में ‘तांडव’ और ‘कृति’ रिलीज हो चुकी हैं। अब जल्द ही उनकी अगली फिल्म ‘सात उचक्के’ रिलीज होने वाली है। डायरेक्टर संजीव शर्मा की इस कॉमिक फिल्म में वह एक ऐसे गली छाप गुंडे के किरदार में हैं, जिसे एक लड़की से प्यार हो जाता है। इस फिल्म, अपने किरदार और करियर से जुड़ी कई बातें मनोज ने बताई इस मुलाकात में...
इस साल आपकी तीन फिल्में आ चुकी हैं, अब चौथी भी आ रही है। करियर के लिहाज से इस साल को कैसा मानते हैं?
वाकई 2016 मेरे लिए बहुत अच्छा रहा। हालांकि हम तो अपना काम करते जाते हैं। इत्तेफाक से इसी साल कई फिल्में रिलीज हुर्इं। मुझे बेहद खुशी है कि ‘अलीगढ़’ और ‘बुधिया सिंह’ जैसी फिल्में दर्शकों ने पसंद कीं। एक क्लास ऐसा तैयार हुआ है, जो इस प्रकार की फिल्में भी अब देखने लगा है। यह एक सुखद संकेत है।
फिल्म ‘सात उचक्के’ का कॉन्सेप्ट और इसमें आपका किरदार क्या है?
मैं इसको केवल एक कॉमेडी फिल्म नहीं कह सकता। इसमें रियलिस्टिक ह्यूमर है। यह फिल्म दरअसल पुरानी दिल्ली के सात उचक्कों की कहानी है। इसमें पुरानी दिल्ली को वास्तविक रूप में दिखाया गया है। इसमें मैं बप्पी जाटवाला का किरदार निभा रहा हूं। वह गली का गुंडा था लेकिन अब उसकी दादागिरी नहीं चलती। अब उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। वह सोना(अदिति शर्मा) के प्यार में पागल है और उससे शादी करना चाहता है। इसलिए वह चोरी का प्लान बनाता है और अपने साथ कुछ और लड़को को जोड़ता है। इसके बाद कहानी में कैसे ट्विस्ट आता है यह आपको फिल्म देखने के बाद पता चलेगा।
फिल्म में आपके साथ कई बेहतरीन एक्टर्स भी हैं, उनके साथ काम करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा?
फिल्म में केके मेनन, अनुपम खेर, अनु कपूर, अदिति शर्मा, विजय राज जैसे कमाल के कलाकार हैं। इनके साथ काम करना मेरे लिए मेमोरेबल एक्सपीरियंस रहा। केके मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। अकसर शूटिंग के ब्रेक के दौरान हम लोग फिल्मों पर चर्चा भी करते थे।
सुना है कि फिल्म में काफी अपशब्द बोले गए हैं, तो क्या सेंसेशन फैलाने के लिए इसमें इतनी गालियां रखी गई हैं?
नहीं नहीं बिल्कुल नहीं। हमें ऐसे सेंसेशन करना नहीं आता। गालियां इसलिए हैं क्योंकि फिल्म के जो किरदार हैं, वो वैसे हैं उनका लहजा वैसा है। अगर आप उन गालियों को निकाल दें तो उनका कैरेक्टर रियल नहीं लगेगा।
क्या आप अपनी फिल्मों की खुद ही रिव्यू भी करते हैं?
मेरी थिंकिंग ऐसी है कि अगर मैं अपनी फिल्में देखता हूं तो उसमें कई खामियां निकाल लेता हूं, जो फिल्म समीक्षक भी नहीं देख पाते हम उतनी बारीकी और गहराई से अपनी फिल्में देखते हैं। फिर लगता है कि उस सीन को और बेहतर किया जा सकता था या उस शॉट को उस एंगल से किया जा सकता था। मेरी पत्नी भी बड़े गौर से मेरी फिल्में देखती हैं और अपनी राय देती हैं।
आप अपने किरदारों में डूब जाने वाले अदाकार माने जाते हैं, इस पर क्या कहना चाहेंगे?
मैं खुद को एक ऐसा एक्टर मानता हूं, जो हर वक्त खुद को आगे ले जाने के बारे में सोचता है और इसी सोच के तहत कदम बढ़ाता है। मैं हमेशा कुछ नया देने की कोशिश करता हूं और इसके लिए मेरी आदत है कि मैं अपने किरदारों में खो जाता हूं, उन्हें आत्मसात कर लेता हूं। किरदार को पढ़ता हूं फिर उसमें ढलता हूं, फिर उसे कैमरे के सामने प्रस्तुत करता हूं। मेरे लिए मेरी हर फिल्म और मेरा हर किरदार अहम होता है।
आपने हालांकि कई डायरेक्टर्स के साथ काम किया है, भविष्य में किन डायरेक्टर्स के साथ काम करने की इच्छा रखते हैं?
मैं बहुत से डायरेक्टर्स के साथ काम कर चूका हूं। किसी एक डायरेक्टर का नाम नहीं ले सकता कि मैं उस डायरेक्टर के साथ काम करना चाहूंगा। अनुराग कश्यप और नीरज पांडे मेरे दोस्त हैं। इनके साथ फ्यूचर में भी काम करना चाहूंगा। मुझे नई प्रतिभाओं से बड़ी आशाएं हैं, जैसे मेरी शॉर्ट फिल्म ‘तांडव’ डायरेक्ट करने वाले देवाशीष मखीजा के साथ मैं एक फिल्म करने की योजना बना रहा हूं।
आपके अपकमिंग प्रोजेक्ट्स कौन से हैं?
मेरी एक थ्रिलर फिल्म ‘मिसिंग’ फरवरी 2017 में आएगी, जिसमें मेरे साथ तब्बू हैं। वह भी अलग ढंग की एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है। इसके अलावा अभी अभी मैंने नीरज पांडे के प्रोडक्शन की एक फिल्म ‘नाम शबाना’ की शूटिंग कंप्लीट की है, जिसमें तापसी पन्नू शबाना के रोल में हैं।
जब दिल कहेगा तब
फिल्म करूंगा डायरेक्ट
इन दिनों कई एक्टर्स डायरेक्शन में भी हाथ आजमा रहे हैं। क्या आगे मनोज का भी कोई फिल्म डायरेक्ट करने का इरादा है? इसके जवाब में वह कहते हैं, ‘फिलहाल मेरी नजर डायरेक्शन की ओर नहीं है। लेकिन अगर कोई ऐसी कहानी मेरे हाथ लगती है और मेरा दिल यह कहेगा कि इसे मैं ही डायरेक्ट करूं तो मैं डायरेक्ट भी कर लूंगा। लेकिन मैंने यह तय कर लिया है कि मैं अपने डायरेक्शन में एक्टिंग नहीं करूंगा।’
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