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मैं सेल्फ मेड मैन हूं: बलराज सिंह

बलराज सिंह एमटीवी के रियालिटी शो रोडीज एक्स 4 के विजेता रह चुके हैं।

मैं सेल्फ मेड मैन हूं: बलराज सिंह
मुंबई. मन में जीत का पक्का इरादा हो तो जीत होती ही है। एमटीवी के रियालिटी शो ‘रोडीज एक्स 4’ में बलराज सिंह की जीत का राज यही है। ‘रोडीज’ में जाते वक्त बलराज के दिमाग में बस एक बात थी, अपनी जीत। यही वजह है, वह हर टास्क को बखूबी निभाते रहे और फिनाले के चैलेंजिंग टास्क में अपने कॉम्पिटीटर गौरव और नवदीश को हराकर विनर बने। विनर बनने के बाद बलराज सिंह ने तुरंत हरिभूमि से फोन पर शेयर की जीत और शो से जुड़ी बातें।
‘रोडीज एक्स 4’ का विनर बनकर कैसा फील कर रहे हैं?
मैं इस चैलेंजिंग शो को जीतकर टॉप आॅफ द वर्ल्ड फील कर रहा हूं। विनर बनने के बाद मुझे लग रहा है कि मैं यूथ आइकन बन गया हूं। मैं जालंधर शहर के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं, इसलिए यंगस्टर्स मुझे देखकर इंस्पायर भी हो रहे हैं। ‘रोडीज एक्स 4’ का विनर बनना अपने आप में एक बड़ी बात है, क्योंकि हर यंगस्टर ‘रोडीज’ में जाने के सपने देखता है।
शो में मिली जीत का क्रेडिट आप किसे देना चाहेंगे?
मैं अपनी जीत का क्रेडिट डिवाइन पावर गॉड, अपने शहर जालंधर, अपने गांव, एमटीवी के सारे व्यूवर्स और अपने गैंग लीडर करण कुंद्रा को देना चाहूंगा।
क्या आपको हमेशा से उम्मीद थी कि आप ही विनर बनेंगे या फिर कभी हार का डर भी सताया?
मैं वास्तव में लाइफ में कई सिचुएशन में फेल हुआ हूं। मेरी जीत का कारण ही मेरे पिछले फेलियर रहे, जिनसे मैंने काफी कुछ सीखा। ‘रोडीज’ में जाते वक्त मेरे दिमाग में बस जीत ही थी, सोच रखा था कि ‘रोडीज’ का टाइटल बस जीतना है।
शो जीतने के लिए आपकी अपनी कोई स्ट्रेटजी थी?
कोई खास स्ट्रेटजी नहीं थी। बस दिमाग में था कि मैं जैसा हूं, वैसा ही रहूंगा। रियल लाइफ में मेरा जो कैरेक्टर है, वही शो में दिखाऊंगा। किसी को अच्छा लगे चाहे बुरा, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे जो हो जाए, मैं फेक फेस नहीं बनूंगा।
शो के दौरान का कोई ऐसा टास्क जो आपको वास्तव में बहुत टफ लगा हो?
मुझे सिर्फ फिनाले टास्क ही सबसे ज्यादा टफ और चैलेंजिंग लगा। लेकिन खतरों से खेलने का मुझे शौक है। मैंने खुद को चैलेंज किया और टास्क करने में कामयाब रहा।
शो में आप अपने अपोजिट सबसे दमदार कंटेस्टेंट किसे मान रहे थे?
मैं शो में अपने आपको किसी से कंपेयर नहीं कर रहा था। यह कॉम्पिटिशन मेरा अपने आप से था। मैं खुद जीतने के लिए खेला, किसी को हराने के लिए नहीं। मेरे माइंड में क्लियर था, मुझे अपनी हार और जीत का खुद को जवाब देना है।
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