Oscar 2026: भारत को झटका, ‘होमबाउंड’ नॉमिनेशन से बाहर; 2001 के बाद फिर टूटा सपना

करण जौहर निर्मित ‘होमबाउंड’ ऑस्कर 2026 की शॉर्टलिस्ट में थी, लेकिन बेस्ट इंटरनेशनल फीचर की फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सकी।
ऑस्कर 2026 (98वें एकेडमी अवॉर्ड्स) में भारत की आधिकारिक एंट्री होमबाउंड को बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेशन नहीं मिला है। नॉमिनेशन्स की घोषणा 22 जनवरी 2026 को अभिनेताओं डेनियल ब्रूक्स और लुईस पुलमैन ने की थी। यह प्रतिष्ठित समारोह 15 मार्च 2026 को होगा।
होमबाउंड के नॉमिनेशन से चूकने से भारत का इस कैटेगरी में लंबा इंतजार जारी है। आखिरी बार भारत की कोई फिल्म 2001 में आमिर खान की लगान नॉमिनेट हुई थी, जो भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित ऑस्कर कैंपेन में से एक बनी। तब से अब तक भारत को इस श्रेणी में कोई नॉमिनेशन नहीं मिला है।
Going global with this year's nominees for International Feature Film. #Oscars pic.twitter.com/NaKlw64YgR
— The Academy (@TheAcademy) January 22, 2026
किन फिल्मों को मिला ऑस्कर 2026 नॉमिनेशन
- द सीक्रेट एजेंट (ब्राजील)
- इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट (फ्रांस)
- सेंटीमेंटल वैल्यू (नॉर्वे)
- सिराट (स्पेन)
- द वॉयस ऑफ हिंद रजब (ट्यूनीशिया)
धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले करण जौहर, अपूर्वा मेहता और अदर पूनावाला द्वारा निर्मित होमबाउंड पत्रकार बशारत पीर के 2020 के न्यूयॉर्क टाइम्स आर्टिकल से प्रेरित है। फिल्म दो दोस्तों शोएब और चंदन की कहानी है, जो हाशिए पर पड़े और व्यवस्थागत भेदभाव से प्रभावित समाज में संघर्ष करते हैं।
कास्ट में विशाल जेठवा, ईशान खट्टर, जान्हवी कपूर प्रमुख हैं। निर्देशन नीरज घेवान ने किया है। कोविड-19 लॉकडाउन की पृष्ठभूमि पर आधारित यह ड्रामा उन दोनों दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो देशव्यापी बंद के दौरान अपनी रोजी-रोटी खो देते हैं, फंस जाते हैं और घर लौटने की कोशिश में सामाजिक असमानता, आर्थिक मुश्किलों तथा संकट में लचीलेपन जैसे मुद्दों को उजागर करती है।
फिल्म ने 2025 में कान फिल्म फेस्टिवल के अन सर्टेन रिगार्ड सेक्शन में प्रीमियर किया, जहां इसे सराहना मिली। बाद में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में भी यह छाई, जहां इसे इंटरनेशनल ऑडियंस चॉइस अवॉर्ड के लिए सेकंड रनर-अप का दर्जा मिला।
हालांकि, ऑस्कर शॉर्टलिस्ट (15 फिल्मों) में जगह बनाने के बावजूद फाइनल 5 में नहीं पहुंच पाई। भारतीय सिनेमा के लिए यह निराशा भरा पल है, लेकिन फिल्म की अंतरराष्ट्रीय पहचान और समीक्षाएं इसे एक मजबूत कृति साबित करती हैं।
