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#MeToo इंटरव्यू में चित्रागंदा ने बेबाकी से रखी बात- सैफ अली खान के बारे में भी बताया

चित्रांगदा सिंह ने ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘ये साली जिंदगी’, ‘इंकार’ और ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’ जैसी लीक से हटकर सब्जेक्ट पर बनी फिल्में कीं और इन फिल्मों में अपने आपको साबित किया।

#MeToo इंटरव्यू में चित्रागंदा ने बेबाकी से रखी बात- सैफ अली खान के बारे में भी बताया

चित्रांगदा सिंह ने ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘ये साली जिंदगी’, ‘इंकार’ और ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’ जैसी लीक से हटकर सब्जेक्ट पर बनी फिल्में कीं और इन फिल्मों में अपने आपको साबित किया।

अब तो एक्ट्रेस के साथ बतौर प्रोड्यूसर भी चित्रांगदा एक्टिव हो गई हैं, उन्होंने फिल्म ‘सूरमा’ को को-प्रोड्यूस किया था। आगे भी एक स्पोर्ट्स बायोपिक बना रही हैं। इन दिनों वह सैफ अली खान स्टारर फिल्म ‘बाजार’ को लेकर चर्चा में हैं।

हाल ही में चित्रांगदा ने कहा था कि यौन शोषण का शिकार होने से बचने के लिए उन्होंने एक फिल्म छोड़ दी थी। वह बॉलीवुड में चल रहे मी टू कैंपेन से खुश हैं। बातचीत चित्रांगदा सिंह से।

आपने एक फिल्म ‘इंकार’ की थी, जिसमें सेक्सुअल हैरेसमेंट के मुद्दे को उठाया गया था। वही मुद्दा इन दिनों बॉलीवुड में मी टू के चलते चर्चा में आ गया है, इस पर आपका क्या कहना है?

मी टू से मैं ही नहीं, इंडस्ट्री की हर महिला खुश है। कामकाजी महिलाएं भी खुश हैं कि अब इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है। सभी ने कभी न कभी शोषण का अनुभव किया है, हैरेसमेंट का अनुभव किया है।

कुछ न कुछ उनके साथ कभी न कभी जरूर हुआ होगा। इसी वजह से आज महिलाएं इस मुद्दे को लेकर बात कर रही हैं। मुझे लग रहा है कि जो महिलाएं आकर अब बातें कर रही हैं, उनका इंटेंशन गलत नहीं हैं।

वह सही इंटेंशन के साथ अपनी बात सामने रख रही हैं। मुझे इस बात की भी खुशी है कि अब मीडिया भी इसे हाईलाइट कर रहा है। अब मीडिया के लिए यह मुद्दा महज एक हेडलाइन नहीं है।

एक तरफ वूमेन एंपावरमेंट की बातें होती हैं, दूसरी तरफ बॉलीवुड में सेक्सुअल हैरेसमेंट..?

यह सिर्फ बॉलीवुड में ही नहीं हो रहा है। आप जिस इंडस्ट्री में भी जाएंगे, आपको यह सब मिलेगा। आप बॉलीवुड के साथ किसी भी इंडस्ट्री में देखेंगे तो सिर्फ लड़कियां ही नहीं, लड़कों को भी इसी तरह की समस्या से जूझना पड़ता है, जो कि वहां कुछ बनना या करना चाहते हैं।

तनुश्री के मामले से मैं भी रिलेट करती हूं, दूसरे लोग भी रिलेट कर रहे हैं। मैं भी इन हालातों में रही हूं, जहां मुझे चुप रहना पड़ा। लेकिन मैंने डिसीजन लिया कि चुपचाप उस फिल्म को छोड़कर निकल जाऊं।

इस तरह का सब फैसला नहीं ले सकते हैं। लेकिन अब इतने लोग आकर अपना सच बयां कर रहे हैं। हम अब उनके सच की इज्जत करें और समाज की हैसियत से उन्हें सच कहने की हिम्मत दें।

तभी आप महिलाओं को एंपावर कर सकते हैं। आप उन्हें नहीं सुनेंगे, तो कैसे चलेगा? यह कहना गलत है कि उसने पहले क्यों नहीं कहा? पहले वह चुप क्यों रही? इस तरह के सवाल करना ठीक नहीं है।

आखिर शोषण करने की वजहें क्या हैं?

सेंस ऑफ पावर। जो सत्ता में है, जो पावर में है, वो दूसरों का सेक्सुअल हैरेसमेंट कर रहा है। पावर में बैठा इंसान ही सामने वाले को एक्सप्लॉयट कर रहा है और लोग अपने फायदे के लिए या अपनी किसी मजबूरी के तहत एक्सप्लॉयट हो भी रहे हैं।

लेकिन अगर कड़ा डिसीजन लेकर फिल्म या अपना काम या अपनी नौकरी छोड़ते हैं तो आप अपना काम खोते हैं, अपना नुकसान करते हैं। अब सवाल यह है कि आप किस हद तक अपना काम खोने या नुकसान सहने को तैयार हैं।

जब मैं सेक्सुअल हैरेसमेंट की संभावना को समझकर उस जगह से बाहर निकली थी तो मुझे पता था कि अब मुझे यह फिल्म नहीं मिलेगी। लेकिन मैंने डिसीजन लिया था। मेरी फिल्म या मेरे करियर का यह नुकसान है, इसका निर्णय तो हमें उस वक्त लेना ही पड़ता है।

लेकिन जो लोग किसी भी वजह से यह निर्णय नहीं ले पाए, उनके साथ सेक्सुअल हैरेसमेंट होने को मैं सही नहीं ठहराती। यह उनके साथ अन्याय है।

आपकी जल्द ही एक फिल्म ‘बाजार’ आ रही है?

मेरे लिए यह एक बहुत खास फिल्म है। यह स्टॉक मार्केट के इर्द-गिर्द की कहानी है। इसमें मैंने सैफ के किरदार शकुन कोठारी की पत्नी मंदिरा कोठारी का किरदार निभाया है।

फिल्म में पैसा, महत्वाकांक्षा, पावर को लेकर गेम चल रहा है। उसी के बीच मंदिरा ऐसे परिवार की बेटी है, जो कि उद्योग जगत का शक्तिशाली परिवार है। लेकिन महत्वाकांक्षा को लेकर उसका नजरिया अलग है।

जबकि उसके पति का नजरिया अलग है। कहने का मतलब है कि मंदिरा का किरदार उसके पति शकुन से बिल्कुल अलग है। इस वजह से उनकी मैरीड लाइफ में टकराव बना रहता है।

फिल्म में सैफ के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?

वह बेहतरीन इंसान हैं, स्टाइलिश हैं। साथ ही अच्छे एक्टर भी हैं। बॉलीवुड में हर कलाकार से वह काफी अलग हैं। मीडियॉकर नहीं हैं। वह वास्तव में जैन्यून जिंदगी जीते हैं। हर विषय पर उनका प्वाइंट ऑफ व्यू अलग होता है।

चर्चा है कि आप किसी मशहूर तैराक पर बायोपिक फिल्म प्रोड्यूस कर रही हैं?

जी हां, यह एक अपाहिज तैराक की कहानी है। वास्तव में मैं इस बात को अभी छिपाकर रखना चाहती थी। लेकिन आपको पता चल ही गया। चलिए, मैं स्वीकार करती हूं कि मैं यह फिल्म बना रही हूं। लेकिन अभी कहानी लिखी जा रही है।

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