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Fake Books seized in Patna: पटना में लंबे समय से खराब क्वालिटी की पुस्तकें प्रकाशित होने की शिकायत मिल रही थी। पुलिस की टीमों ने शुक्रवार को पांच ठिकानों में दबिश देकर 25 करोड़ की नकली किताबें बरामद की है।

Fake Books seized in Patna: बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को 25 करोड़ की नकली किताबें पकड़ी गई हैं। भारती भवन के शिकायत पर पुलिस ने पांच प्रिंटिंग प्रेस सीज कर दिए। छापेमारी में यहां अलग-अलग ब्रांड की नकली किताबें मिली। पकड़ी गई किताबों में सर्वाधिक संख्या CBSE और  NCERT की हैं। दो दिन के अंदर इन्हें मार्केट में सप्लाई करने की तैयारी थी। 

बाजार में उपलब्ध हैं 40% नकली किताबें 
भारती भवन को एक साल से खराब क्वालिटी की शिकायत मिल रही थी। जांच कराई तो पता चला कि पटना में बिकने वाली भारती भवन की 40 प्रतिशत किताबें नकली हैं। और जानकारी जुटाने पर पता कि पटना के रामाकृष्णा नगर क्षेत्र में 3 और बायपास क्षेत्र में दो प्रिंट प्रेस और गोडाउन हैं, जहां बड़े-बड़े ब्रांड्स के नाम देकर नकली किताबें छापी जाती हैं। पुलिस ने मुख्य सरगना राकेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।

25 करोड़ की नकली किताब बरामद
फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद सिटी एसपी ने एसडीपीओ गौरव कुमार और थाना प्रभारियों की टीम गठित कर छापेमारी के आदेश दिए। जहां लगभग 25 करोड़ की नकली किताबें बरामद की गई। पुलिस ने रामकृष्णा नगर थाना और बायपास थाने में केस दर्ज किया है।

राजकमल और एस चांद की नकली किताबें
पटना के सीज किए गए प्रिंटिंग प्रेस में सीबीएससी और एनसीईआरटी के अलावा भारती भवन, राजकमल और एस चांद सहित एक दर्जन प्रकाशन की किताबें छापी जा रही थीं। प्रिंटिंग, बाइंडिंग और कटिंग बाद गोडाउन में इन्हें बाजार के लिए तैयार किया जाता था। 3 प्रेस में तो सिर्फ एनसीईआरटी और सीबीएसई की नकली किताबें हीं छापी जाती थीं। तकरीबन 20 करोड़ की किताबें एनसीईआरटी और सीबीएसई की ही मिली हैं।  

2020 में पकड़ी थी  9 करोड़ की नकली किताबें
पुलिस ने फर्जीवाड़े के सरगना राकेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। बताया कि 2020 में भी इस पर रेड पड़ी थी। उस समय राकेश के 6 ठिकानों से 9 करोड़ की नकली किताबें बरामद की गईं थीं। राकेश जेल भी गया, लेकिन 6 माह बाद छूटते ही पुन: नकली किताबों का धंधा शुरू कर दिया। मामला अभ भी कोर्ट में विचाराधीन है।  

बाजार से गायब CBSE और NCERT की किताबें 
पटना में सीबीएसई और एनसीईआरटी की किताबें ही ज्यादातर स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं। इस समय डिमांड ज्यादा है, लेकिन डीलर की सेटिंग इन लोगों ने बाजार से सीबीएसई और एनसीईआरटी की किताबें गायब करा दी। ताकि, अभिभावक नकली किताबें खरीदने को मजबूर हों।  

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