B.Sc Nursing में 30% सीटें खाली: दोबारा काउंसलिंग की संभावना कम, 7751 में से 5422 पर ही हुआ एडमिशन

प्रदेश में बीएससी नर्सिंग एडमिशन की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। इस साल प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 2329 सीटें लैप्स हो गई हैं। कुल 7751 सीटों में से केवल 5422 सीटों पर ही प्रवेश हो सका। एडमिशन की आखिरी तारीख 31 दिसंबर थी और इसके बाद बची हुई सीटें स्वतः निरस्त हो गईं।
हालांकि यदि प्रवेश की तारीख दोबारा बढ़ाई जाती है तो इन सीटों पर फिर से प्रक्रिया शुरू हो सकती है, लेकिन इसकी संभावना बेहद कम बताई जा रही है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) ने जीरो परसेंटाइल से एडमिशन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है।
खाली सीटों को देखते हुए राज्य शासन ने इस बार 10 परसेंटाइल अंक वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश की अनुमति दी थी। इसके बावजूद लगभग 30 फीसदी सीटें खाली रह गईं। काउंसलिंग के चार राउंड के बाद प्रदेश में 57 फीसदी सीटें खाली थीं, जिन्हें 10 परसेंटाइल के आधार पर भरने की छूट दी गई। लेकिन इस प्रक्रिया में भी केवल 37 फीसदी सीटें ही भर पाईं।
आईएनसी ने पहले एडमिशन की अंतिम तिथि 30 नवंबर तय की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 दिसंबर किया गया। हालांकि चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नवंबर में आईएनसी को पत्र लिखकर परसेंटाइल की बाध्यता खत्म करने और तारीख आगे बढ़ाने की मांग की थी। परिषद ने तारीख तो बढ़ा दी, लेकिन क्वालिटी एजुकेशन का हवाला देते हुए परसेंटाइल कम करने से मना कर दिया।
बीते वर्षों की बात करें तो 2023 में अचानक प्रवेश की आखिरी तारीख 28 फरवरी तक बढ़ा दी गई थी। उस समय मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में जीरो परसेंटाइल से एडमिशन की अनुमति दी गई थी। प्रदेश में पिछले साल 5 परसेंटाइल अंक वाले छात्रों को भी प्रवेश मिला था, लेकिन इसके बावजूद 900 से अधिक सीटें खाली रह गई थीं।
बीएससी नर्सिंग एक प्रोफेशनल कोर्स है, इसलिए शासन के लिए इंट्रेंस एग्जाम कराना अनिवार्य माना जाता है। अगर ऐसा न हो, तो 12वीं बायोलॉजी के अंकों के आधार पर सीधे एडमिशन दिए जा सकते हैं, जैसा कि 4–5 साल पहले कुछ समय के लिए हुआ भी था।
स्थिति यह हो गई है कि कई निजी कॉलेज छात्रों को अलग-अलग ऑफर देने लगे हैं। कुछ जगहों पर 52 से 58 हजार रुपये सालाना ट्यूशन फीस से भी कम में एडमिशन की पेशकश की जा रही है। इसके बावजूद सीटें नहीं भर पा रही हैं। पहले के वर्षों में औसतन 20 फीसदी सीटें खाली रहती थीं, लेकिन अब हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
