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सभी स्वस्थ रहें, यह राज्य के विकास की पहली शर्त: डॉ. रमन सिंह

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य के विकास और हर व्यक्ति की समृद्धि और खुशहाली के लिए पहली शर्त ये है कि सब लोग स्वस्थ रहें। उन्होंने कहा - इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने अस्पतालों के विकास के साथ-साथ मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राज्य के प्रत्येक परिवार को 50 हजार रूपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा दी है।

सभी स्वस्थ रहें, यह राज्य के विकास की पहली शर्त: डॉ. रमन सिंह
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मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य के विकास और हर व्यक्ति की समृद्धि और खुशहाली के लिए पहली शर्त ये है कि सब लोग स्वस्थ रहें। उन्होंने कहा - इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने अस्पतालों के विकास के साथ-साथ मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राज्य के प्रत्येक परिवार को 50 हजार रूपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा दी है।
मुख्यमंत्री आज सवेरे आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ की 36वीं कड़ी में प्रदेशवासियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा संचालित गतिविधियों और इन सेवाओं के तहत प्रदेश को मिली उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और जनता को मलेरिया, डेंगू, पीलिया आदि मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए शासन की ओर से किए जा रहे उपायों के बारे में बताया। साथ ही इन बीमारियों से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
उन्होंने कहा - छत्तीसगढ़ में लगभग 85 लाख बच्चों को मीजल्स (खसरा) से बचाव के लिए टीका लगाने का विशेष अभियान शुरू किया गया है। उसी तरह गर्भवती माताओं को रूबेला से बचाव के लिए टीके लगाए जाएंगे। राज्य के सरकारी-निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों में टीके लगाने की व्यवस्था की गई है। डॉ. सिंह ने कहा - रूबेला की बीमारी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान हो सकती है। प्रारंभिक गर्भावस्था में अगर माता रूबेला से संक्रमित हो जाती है, तो उसके बच्चों में यह रोग जन्मजात हो जाता है। इसे ध्यान में रखकर केन्द्र सरकार ने सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम में मीजल्स तथा रूबेला के टीकों को शामिल किया है। ये टीके विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रमाणित हैं।
मुख्यमंत्री ने मीजल्स और रूबेला से क्रमशः बच्चों और गर्भवती माताओं को सुरक्षित रखने के लिए राज्य में चलाए जा रहे अभियान में सभी लोगों और संगठनों के सहयोग का भी आव्हान किया। उन्होंने कहा - हमने देखा है कि सरकारी और निजी संगठनों तथा व्यक्तिगत प्रयासों से भारत को पोलियो मुक्त करने में सफलता मिली थी।
मैं चाहता हूं कि डॉक्टरों के संगठन और समाज सेवी संस्थाएं मीजल्स और रूबेला के खिलाफ अभियान में बढ़-चढ़ कर भागीदार निभाएं और अभियान को सफल बनाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस अभियान के सफल संचालन के लिए राज्य शासन द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ, प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग, आदिम जाति विकास विभाग और पंचायत राज संस्थाओं सहित निजी डॉक्टरों और नर्सिंग होम आदि का भी सहयोग लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा - स्वास्थ्य सेवाओं में विशेष आवश्यकता के लिए विशेष योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। जच्चा-बच्चा की अच्छी सेहत भी ऐसी ही एक विशेष आवश्यकता है। इसे ध्यान में रखकर राज्य में एक नई पहल करते हुए सभी 27 जिला अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग (एमसीएच विंग) की स्थापना की जा रही है। राज्य सरकार को मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने में मिली सफलता का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा - मातृ मृत्यु दर वर्ष 2003 में प्रति एक लाख पर 365 थी, जो घट कर 173 हो गई है। इस अवधि में शिशु मृत्यु दर प्रति एक हजार पर 70 से घट कर 39 रह गई है। राज्य में बच्चों के सम्पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत 48 से बढ़कर 76 और संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 18 से बढ़कर 70 हो गया है।
डॉ. सिंह ने बरसात के दिनों में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी बरतने की जरूरत बल देने हुए कहा कि ये बीमारियां बहुत छोटे रूप में शुरू होती हैं, लेकिन सही समय पर सही उपचार नहीं करने से काफी कष्टप्रद और नुकसान देह साबित होती हैं। उन्होंने कहा - पीलिया, डेंगू, मलेरिया आदि मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए जहां व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, वहीं मलेरिया, डेंगू और जापानी इंसेफेलाइटिस आदि के इलाज के लिए सभी जिला अस्पतालों मे समुचित व्यवस्था की गई है। मितानिनों को प्रशिक्षित करते हुए आरडी किट और मलेरिया रोधी दवा - ए.सी.टी. और क्लोरोक्विन भी उनकों पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दी गई है।
डेंगू के निदान के लिए राज्य के सात सरकारी अस्पतालों में सेंटिनल सर्विलेंस हॉस्पिटल के रूप में व्यवस्था की गई है, जहां डेंगू के मरीजों की पहचान और रोग निदान के लिए आईजीएम एलिजा टेस्ट किट दिए गए हैं। प्रदेश के 19 औद्योगिक अस्पतालों को भी तैयार रखा गया है कि वे संभावित मरीजों को नजदीक के सेंटिनल सर्विलेंस अस्पताल भेजें। मुख्यमंत्री ने कहा - पीलिया से बचाव के लिए आम नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
लोगों से कहा जा रहा है कि पीने के पानी को उबालकर और ठण्डा करके पीना चाहिए। उस पानी को साफ बरतन में ढंक कर रखना चाहिए। शुद्ध और ताजे भोजन का सेवन करना चाहिए। बाजार के कटे-फटे फल और सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। सभी प्रकार के फलों और सब्जियों को अच्छी तरह से धो कर साफ करने के बाद ही सेवन करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा - बासी भोजन का सेवन नहीं करना भी सतर्कता की दृष्टि से बहुत जरूरी है। उन्होंने भोजन के पहले और शौच के बाद स्वच्छ पानी और साबुन से हाथ धोने, घर के आस-पास साफ-सफाई का ध्यान रखने और पीलिया के लक्षण नजर आने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टरी जांच और इलाज करवाने की भी सलाह दी।
मुख्यमंत्री ने रेडियो वार्ता में कहा कि इस बारे में स्वास्थ्य विभाग की आरोग्य सेवा के टोल फ्री नम्बर 104 पर भी विस्तार से जानकारी ली जा सकती है। डॉ. सिंह ने कहा - बारिश के इस मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बहुत होती हैं। सर्पदंश पीड़ितों को तुरंत डॉक्टरी इलाज मुहैया कराना चाहिए। उन्होंने कहा - यह बात स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि पीलिया और अन्य बीमारियों की तरह सर्पदंश का इलाज भी झाड़-फूंक से नहीं किया जा सकता।

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