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CSVTU की लापरवाही, इंजीनियरिंग की एग्जाम में आउट ऑफ सिलेबस आया पेपर, परीक्षा रद्द

छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्याल (सीएसवीटीयू) के अधिकारियों की लापरवाही एक बार फिर सामने आई। इस बार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इंजीनियरिंग की सेमेस्टर परीक्षा में परीक्षाथिर्यों से पुराने सिलेबस के प्रश्न पूछे गए।

CSVTU की लापरवाही, इंजीनियरिंग की एग्जाम में आउट ऑफ सिलेबस आया पेपर, परीक्षा रद्द

छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्याल (सीएसवीटीयू) के अधिकारियों की लापरवाही एक बार फिर सामने आई। इस बार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इंजीनियरिंग की सेमेस्टर परीक्षा में परीक्षाथिर्यों से पुराने सिलेबस के प्रश्न पूछे गए।

जबकि विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में नोटिस जारी कर बताया गया था कि अप्रैल-मई सेमेस्टर परीक्षा से सभी सेमेस्टर परीक्षाओं में नए सिलेबस से ही प्रश्न पूछे जाएंगे।

अब जब मामला प्रकाश में आ गया है तो विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मामले की जांच करवा कर दोषी व्यक्ति पर सख्त कारर्वाई करने की बात कह रहा है। वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा रद्द कर 11 मई को पुन: परीक्षा लेने की घोषणा भी कर दी है।

उल्लेखनीय है कि सीएसवीटीयू से संबद्ध प्रदेशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में बेचलर आफ इंजीनियरिंग (बीई) की अप्रैल-मई सेमेस्टर परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है।

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इसके तहत गुरुवार को ईलेक्ट्रानिक्स एंड टेलिकम्यूनिकेशन ब्रांच के आठवें सेमेस्टर के विद्याथिर्यों की पावर एंड इलेक्ट्रानिक्स विषय की परीक्षा ली गई। लेकिन जैसे ही परीक्षाथिर्यों ने प्रश्न पत्र पढ़ा, उनके होश उड़ गए।

प्रश्न पत्र में ज्यादातर प्रश्न पुराने सिलेबस से पूछे गए थे। जबकि विद्याथिर्यों ने विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार नए सिलेबस से परीक्षा की तैयारी की थी। परीक्षाथिर्यों की माने तो पांच यूनिट में से चार यूनिट में प्रश्न पुराने सिलेबस से पूछे गए थे।

इसकी शिकायत परीक्षाथिर्यों ने पयर्वेक्षकों से की जिसके बाद मामला कॉलेजों के माध्यम से विश्वविद्यालय के संज्ञान में आया। मामले की जानकारी होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन भी सकते में आ गया और अपनी गलती स्वीकार करते हुए 11 मई को परीक्षा दोबारा आयोजित करने की घोषणा कर दी।

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गलती से नहीं लेते सबक

ऐसे नहीं है कि सीएसवीटीयू द्वारा पहली बार इस तरह की लापरवाही की गई है। पिछले साल भी इंजीनयरिंग के एक प्रश्न पत्र में सिलेबस से बाहर के प्रश्न पूछे गए थे। जिसके बाद विश्वविद्यालय को परीक्षाथिर्यों को बोनस अंक देना पड़ा था।

परीक्षाथिर्यों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पहले की गलतियों से सबक नहीं लेता है और हर बार इस तरह की लापरवाही दिखा कर विद्याथिर्यों को परेशान करता है।

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एक पेपर में 20 हजार खर्च

जानकारों की मानें तो एक पेपर के आयोजन में विश्वविद्यालय का 15 से 20 हजार रुपए तक खर्च होता है। क्योंकि विश्वविद्याल को पेपर सेट करने वाले प्राध्यापकों, उसे छापने वाले मुद्रक, परीक्षा केंद्रों में नियुक्त पयर्वेक्षकों को राशि का भुगतान करता पड़ता है।

इसके अलावा पेपर के ट्रांसपोर्टेशन सहित अन्य खर्च भी वहन करने होते हैं। इसलिए अगर कोई पेपर कैंसिल होता है और उसे दोबारा आयोजित करना पड़ता है तो विश्वविद्यालय को भी आर्थिक क्षति होती है।

इनपुट-भाषा

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