Silver Price: चांदी की फ्यूचर कीमतों में 8 हजार की गिरावट, हिंदुस्तान जिंक के शेयर 2% गिरे; सिल्वर ETF भी डे-लो पर

नए साल पर सिल्वर की कीमतों में लगातार नरमी देखी जा रही।
Silver Price: नए साल पर चांदी की चमक पिछले साल जैसी नजर नहीं आ रही। एमसीएक्स में सिल्वर फ्यूचर्स में लगातार गिरावट जारी है। चांदी की कीमतों में तेज गिरावट का सीधा असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। हिंदुस्तान जिंक के शेयर करीब 2 फीसदी गिरकर 632.60 रुपये पर आ गए। कंपनी देश की सबसे बड़ी चांदी उत्पादक है और 99.9 फीसदी शुद्धता वाली रिफाइंड सिल्वर का उत्पादन करती।
चांदी में आई तेज कमजोरी के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना,जिससे स्टॉक पर दबाव बना।
चांदी की कीमतों में क्या हुआ?
एमसीएक्स पर मार्च एक्सपायरी वाली सिल्वर फ्यूचर्स करीब 3 फीसदी गिरकर 251729 रुपये प्रति किलो पर आ गई थी। इससे पहले दिन के कारोबार में इस कॉन्ट्रैक्ट ने 259692 रुपये प्रति किलो का ऑल-टाइम हाई छुआ था। मई एक्सपायरी की चांदी 2.5 फीसदी गिरकर 258566 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई जबकि जुलाई एक्सपायरी के कॉन्ट्रैक्ट में भी 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट रही और भाव 265028 रुपये प्रति किलो दर्ज किए गए।
दिन के हाई से देखें तो चांदी के दाम में करीब 8 हजार रुपये प्रति किलो तक फिसल चुके। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी दिखी और स्पॉट सिल्वर 3.5 फीसदी गिरकर 78.43 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इससे पहले 29 दिसंबर को चांदी ने 83.62 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड बनाया था।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हालिया गिरावट की बड़ी वजह प्रॉफिट बुकिंग मानी जा रही। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर में मजबूती और इस हफ्ते आने वाले अहम यूएस जॉब्स डेटा से पहले निवेशकों की सतर्कता ने भी कीमती धातुओं पर दबाव डाला।
सिल्वर ईटीएफ भी गिरे
चांदी में गिरावट का असर सिल्वर ईटीएफ पर भी साफ दिखा। 360 वन सिल्वर ईटीएफ करीब 2 फीसदी टूट गया। वहीं, एक्सिस सिल्वर ईटीएफ, टाटा सिल्वर ईटीएफ, एसबीआई सिल्वर ईटीएफ और HDFC Silver ETF हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे लेकिन दिन की शुरुआती तेजी पूरी तरह खत्म हो गई। निपॉन इंडिया, यूटीआई, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, मोतीलाव ओसवाल ईटीएफ फंड करीब 0.5 फीसदी की बढ़त के साथ रहे। हालांकि ये भी दिन के उच्च स्तर से नीचे आ गए।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी में उतार-चढ़ाव सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा रहता है और इसमें बबल जैसी चाल दिख रही। सलाह है कि निवेश तभी करें जब कीमतें सपोर्ट लेवल के आसपास स्थिर हों। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मीडियम टर्म में चांदी का आउटलुक अब भी मजबूत है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ी इंडस्ट्रियल डिमांड बनी हुई है जबकि सप्लाई कई सालों से तंग है। फिलहाल,चांदी और सोने की दिशा डॉलर और ब्याज दरों पर निर्भर करेगी।
(प्रियंका कुमारी)
