चांदी का नया रिकॉर्ड: पहली बार ₹3 लाख के पार पहुंचा भाव, 2026 में ₹4 लाख तक जाने की उम्मीद, निवेश करें या इंतजार?

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19 जनवरी 2026 को MCX पर चांदी की कीमत पहली बार ₹3 लाख प्रति किलो के स्तर को पार कर गई। 

Silver Price Today: MCX पर चांदी पहली बार ₹3 लाख प्रति किलो के पार पहुंची। जानिए तेजी की वजह, 2026 का प्राइस टारगेट और चांदी में निवेश के सुरक्षित तरीके।

Silver Price Today, 19 January: देश के कमोडिटी बाजार में चांदी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 19 जनवरी 2026 को MCX पर चांदी की कीमत पहली बार ₹3 लाख प्रति किलो के स्तर को पार कर गई। एक ही दिन में इसमें करीब ₹14,000 की तेज उछाल देखने को मिली, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों के बीच हलचल बढ़ गई है।

पिछले कारोबारी सत्र में चांदी लगभग ₹2.87 लाख प्रति किलो के आसपास बंद हुई थी, जबकि आज के कारोबार में इसने सीधे ₹3 लाख का आंकड़ा छू लिया। वहीं, सर्राफा बाजार में भी चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी रही और भाव ₹2.94 लाख प्रति किलो के करीब पहुंच गए।


1 महीने में ₹2 लाख से ₹3 लाख

अगर चांदी के भाव के सफर पर नजर डालें तो इसकी रफ्तार चौंकाने वाली है। दिसंबर 2025 के मध्य में MCX पर चांदी पहली बार ₹2 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंची थी। इसके बाद महज एक महीने के भीतर इसमें ₹1 लाख की और बढ़त दर्ज हुई।

आंकड़े बताते हैं कि जहां चांदी को ₹1 लाख से ₹2 लाख तक पहुंचने में करीब 9 महीने लगे थे, वहीं ₹50 हजार से ₹1 लाख का सफर तय करने में 14 साल का वक्त लगा था। लेकिन अब कीमतों की चाल पहले से कहीं ज्यादा तेज हो चुकी है।

आखिर क्यों लगातार महंगी हो रही है चांदी?

चांदी की कीमतों में इस तेजी के पीछे कई मजबूत वजहें सामने आ रही हैं। सबसे बड़ा कारण इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड है। आज चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), 5G टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर्स में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। ग्रीन एनर्जी पर बढ़ते वैश्विक फोकस ने चांदी की खपत को नई ऊंचाई दी है।

दूसरी ओर, सप्लाई साइड कमजोर बनी हुई है। चांदी का बड़ा हिस्सा तांबा और जिंक जैसी धातुओं की खुदाई के दौरान बाय-प्रोडक्ट के रूप में निकलता है। जब तक बेस मेटल्स की माइनिंग नहीं बढ़ती, तब तक चांदी की सप्लाई भी सीमित रहती है। कई देशों में सख्त पर्यावरण नियमों के कारण नई खदानों की मंजूरी भी धीमी हो गई है।

इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी ने भी चांदी को सपोर्ट दिया है। डॉलर इंडेक्स 109 के ऊपरी स्तर से फिसलकर 98 के करीब आ चुका है, जिससे डॉलर में तय होने वाली चांदी की कीमतों को मजबूती मिली है।

क्या अभी चांदी में निवेश करना सही रहेगा?

बाजार के जानकारों का मानना है कि चांदी में तेजी का ट्रेंड अभी खत्म नहीं हुआ है। कई ब्रोकरेज और एक्सपर्ट्स 2026 में चांदी के और ऊंचे स्तर देखने की उम्मीद जता रहे हैं।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड के चलते चांदी 2026 में ₹3.20 लाख प्रति किलो तक जा सकती है। वहीं, सैमको सिक्योरिटीज का कहना है कि टेक्निकल ब्रेकआउट के आधार पर भाव ₹3.90 लाख के करीब भी पहुंच सकते हैं।

कमोडिटी एक्सपर्ट नीलेश सुराना का मानना है कि अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित कटौती और ग्रीन एनर्जी सेक्टर की मांग चांदी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में $100 प्रति औंस के स्तर तक ले जा सकती है, जो भारतीय बाजार में ₹3.5 से ₹4 लाख प्रति किलो के बराबर होगा।

चांदी में निवेश के कौन-कौन से सुरक्षित तरीके हैं?

अगर आप चांदी में निवेश करना चाहते हैं, तो इसके तीन प्रमुख विकल्प मौजूद हैं। पहला तरीका फिजिकल सिल्वर का है, जिसमें सिक्के या बार खरीदे जाते हैं। इसमें शुद्धता और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी होता है, इसलिए BIS हॉलमार्क वाली चांदी ही लेनी चाहिए।

दूसरा विकल्प सिल्वर ETF है। यह स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाला फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है, जो चांदी की कीमत को ट्रैक करता है। इसमें स्टोरेज या चोरी का जोखिम नहीं होता, लेकिन इसके लिए डिमैट अकाउंट जरूरी है।

तीसरा तरीका सिल्वर फ्यूचर्स का है, जिसमें MCX पर कॉन्ट्रैक्ट के जरिए ट्रेडिंग की जाती है। इसमें कम पूंजी से बड़ा सौदा किया जा सकता है, लेकिन जोखिम भी ज्यादा होता है, इसलिए यह अनुभवी निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है।

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