शेयर बाजार में हाहाकार: निफ्टी 3 महीने के निचले स्तर पर, सेंसेक्स 1200 अंक टूटा; मार्केट के धराशायी होने की 5 बड़ी वजहें

Indian stock market sensex nifty decline
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शेयर बाजार में मंगलवार को भारी बिकवाली हुई। 

Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार के दिन भारी गिरावट आई। सेंसेक्स करीब 1200 अंक टूट गया जबकि निफ्टी अपने तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया। आखिर क्यों बाजार धराशायी हुआ।

Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को हाहाकार मचा। बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेत, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और मिले-जुले तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा तोड़ दिया। दिन के अंत तक सेंसेक्स 1065.71 अंक गिरकर 82,180.47 के आसपास बंद हुआ जबकि निफ्टी 353 अंक फिसलकर 25232.50 पर पहुंच गया। निफ्टी 15 अक्टूबर 2025 के बाद पहली बार 25200 के स्तर से नीचे भी आया। ये अलग बात है कि बाजार बंद होते-होते निफ्टी उस स्तर से ऊपर आ गया।

निफ्टी-50 में बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और ईटरनल जैसे शेयर 2 फीसदी तक टूटे। वहीं एनटीपीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर हल्की तेजी के साथ टिके रहे। बाजार की चौड़ाई पूरी तरह नकारात्मक रही-जहां 800 से ज्यादा शेयर चढ़े, वहीं 3,000 से ज्यादा में गिरावट दर्ज हुई।

मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा दर्द

बेंचमार्क के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 2 फीसदी टूटा और इंट्राडे में अपने 100-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे फिसल गया। ओबेरॉय रियल्टी सबसे बड़ा लूजर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप-100 लगातार तीसरे सत्र में गिरा और 3 फीसदी से ज्यादा टूट गया। न्यूजेन सॉफ्टवेयर, डेटा पैटर्न्स, ओला इलेक्ट्रिक और आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट जैसे शेयरों में 12 फीसदी तक की गिरावट दिखी।

क्यों बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आई

ट्रेड वॉर की चिंता: US टैरिफ पॉलिसी को लेकर नई अनिश्चितता के बाद ट्रेड-वॉर की चिंताएं फिर से सामने आईं, जिससे दुनिया भर में रिस्क लेने की क्षमता पर असर पड़ा। US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और US और यूरोप के बीच ट्रेड टेंशन बढ़ने की आशंकाओं से दुनिया भर के मार्केट में बिकवाली शुरू हो गई, जिसका असर भारतीय इक्विटी पर भी पड़ा।

एफआईआई की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार को नीचे खींचा। एफआईआई ने सोमवार को 3,262.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो इस महीने लगातार 10वें सेशन में नेट आउटफ्लो था, 2 जनवरी को थोड़ी खरीदारी को छोड़कर। लगातार विदेशी बिकवाली ने फ्रंटलाइन इंडेक्स पर दबाव बढ़ा दिया है और खरीदारी में दिलचस्पी कम कर दी है।

Q3 की मिली-जुली कमाई: कमाई से जुड़े संकेत मिले-जुले रहे। सोमवार को विप्रो लिमिटेड के शेयर तेज़ी से गिरे, जब इस आईटी कंपनी ने दिसंबर तिमाही के नतीजों के साथ उम्मीद से कमज़ोर शॉर्ट-टर्म गाइडेंस जारी किया। आईटी इंडेक्स 1.1% गिरा और बड़े सेक्टर्स में सबसे ज़्यादा गिरा।

कमज़ोर ग्लोबल संकेत: कमज़ोर ग्लोबल संकेतों ने सेंटिमेंट को और खराब कर दिया। एशियाई बाज़ारों में, साउथ कोरिया का कोस्पी ऊपर ट्रेड कर रहा था जबकि जापान का निक्केई 225, शंघाई का SSE कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग नुकसान में थे। फेडरल हॉलिडे की वजह से सोमवार को US बाज़ार बंद थे। 20 जनवरी को वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स 1% से ज़्यादा नीचे ट्रेड कर रहे थे।

रुपये में गिरावट: इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की मज़बूत डिमांड और लगातार विदेशी फंड के निकलने से रुपया ट्रेड में कमज़ोर हुआ और US डॉलर के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 90.98 पर आ गया। फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमज़ोर घरेलू इक्विटी मार्केट ने करेंसी पर दबाव बनाए रखा।

ट्रंप टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट का फैसला: इन्वेस्टर्स ट्रंप-एरा टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले का भी इंतजार कर रहे हैं। विजयकुमार ने कहा कि एक विपरीत फैसला मार्केट के डायनामिक्स को तेजी से बदल सकता है, हालांकि समय और नतीजा अभी भी अनिश्चित है।

क्रूड में तेजी: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 0.11 प्रतिशत बढ़कर USD 64.01 प्रति बैरल हो गईं। क्रूड की बढ़ती कीमतें भारत के लिए महंगाई और फिस्कल दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ाती हैं।

PSU बैंक इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा टूटा। जानकारों का मानना है कि निफ्टी अगर 25550 के ऊपर टिक नहीं पाया तो बाजार में दबाव बना रह सकता है।

(प्रियंका कुमारी)

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