Pharma Stocks Decline: जेफरीज की रिपोर्ट के बाद फार्मा स्टॉक्स में बड़ी गिरावट, निवेश से पहले जानें क्या है मामला

Pharma Stocks Decline Jefferies Report
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जेफरीज की रिपोर्ट के बाद भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर में तेज गिरावट देखने को मिली है। 

जेफरीज की रिपोर्ट के बाद भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर में तेज गिरावट देखने को मिली है। निफ्टी फार्मा इंडेक्स दबाव में है और निवेशकों की चिंता बढ़ी है। जानिए इस गिरावट के पीछे की वजह, आगे का आउटलुक और निवेशकों के लिए क्या संकेत छुपे हैं।

मुंबई। अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की हालिया रिपोर्ट (Jefferies Report) ने भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर की चाल बदल दी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद फार्मा कंपनियों के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे निफ्टी फार्मा इंडेक्स में शामिल ज्यादातर स्टॉक्स गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। बाजार की इस प्रतिक्रिया से साफ है कि निवेशकों ने रिपोर्ट में जताई गई चिंताओं को गंभीरता से लिया है और फिलहाल सतर्क रुख अपना लिया है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह जेफरीज का यह अनुमान है कि वर्ष 2026 की पहली छमाही फार्मा सेक्टर के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकती है। Jefferies Report में खास तौर पर उन कंपनियों पर दबाव की आशंका जताई गई है, जिनकी आय का बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवा रेवलिमिड से जुड़ा है।

Jefferies Report के मुताबिक, इस दवा से होने वाली कमाई में आगे चलकर कमी आ सकती है, जिससे मुनाफे पर असर पड़ने का खतरा है। इसी आशंका ने निवेशकों को मुनाफावसूली की ओर प्रेरित किया और शेयरों में गिरावट तेज हो गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि बिकवाली किसी एक या दो कंपनियों तक सीमित नहीं, पूरे फार्मा सेक्टर में दबाव दिख रहा है। कई ऐसी कंपनियों के शेयर भी टूटे, जिन्हें आमतौर पर मजबूत फंडामेंटल वाली माना जाता है। इसका संकेत यह है कि निवेशक फिलहाल सेक्टर आधारित जोखिम से बचना चाहते हैं और अलग-अलग शेयर चुनने के बजाय पूरे फार्मा क्षेत्र से दूरी बनाकर चल रहे हैं। जेफरीज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घरेलू बाजार में फार्मा कंपनियों की ग्रोथ निकट भविष्य में बहुत तेज नहीं रहने वाली है।

Jefferies Report में अनुमान जताया गया है कि इस सेक्टर में वृद्धि दर सिंगल डिजिट तक ही सीमित रह सकती है। साथ ही आने वाले समय में नई दवाओं के लॉन्च के दौरान प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों और मार्जिन पर दबाव बन सकता है। यही वजह है कि बाजार ने पहले ही इस जोखिम को कीमतों में उतारना शुरू कर दिया है। हालांकि, तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि कुछ चुनिंदा फार्मा कंपनियां ऐसी हैं, जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत है और जो इस कमजोर दौर में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

ब्रोकरेज ने कुछ स्टॉक्स को अपनी पसंदीदा सूची में शामिल किया है, जिनमें लंबी अवधि में अच्छी रिकवरी और ग्रोथ की संभावना जताई गई है। इससे पता चलता है कि गिरावट के बावजूद सभी फार्मा शेयर एक जैसे नहीं हैं। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी बरतने का है। फार्मा सेक्टर अभी दबाव में है और जल्दबाजी में लिया गया फैसला किसी नुकसान का कारण बन सकता है। ब्रोकरेज रिपोर्ट भविष्य की संभावनाओं पर आधारित होती हैं और बाजार उन पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। ऐसे में बेहतर यही होगा कि निवेशक किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की बुनियादी स्थिति, कमाई के स्रोत और दीर्घकालिक रणनीति को अच्छे से परखें। समझदारी भरा फैसला ही इस उतार-चढ़ाव भरे दौर में सुरक्षित निवेश की कुंजी हो सकता है।

(एपी सिंह की रिपोर्ट)

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