Budget 2026: विदेशी अकाउंट या एसेट है और बताया नहीं? अब 6 महीने में सुलझा सकते मामला, सरकार लाई क्लीन-अप स्कीम

Foreign asset disclosure scheme
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Foreign asset disclosure scheme

Foreign asset disclosure scheme: सरकार ने विदेशी संपत्तियों के खुलासे के लिए 6 महीने की विशेष स्कीम शुरू की। टैक्सपेयर्स बिना केस और भारी पेनल्टी के अपनी स्थिति नियमित कर सकेंगे। जानें क्या है ये स्कीम।

Foreign asset disclosure scheme: आम बजट में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देते हुए विदेशी संपत्तियों के खुलासे के लिए 6 महीने की विशेष योजना की घोषणा की गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि इस स्कीम का मकसद डर या सख्ती नहीं, बल्कि स्वेच्छा से टैक्स अनुपालन को बढ़ावा देना है। यह योजना उन लोगों के लिए लाई गई है, जिन्होंने किसी वजह से विदेश में मौजूद अपनी आय या संपत्ति की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को नहीं दी है।

वित्त मंत्री ने साफ कहा कि यह कदम खास तौर पर छोटे टैक्सपेयर्स, छात्रों, युवा प्रोफेशनल्स, सैलरीड क्लास और हाल ही में विदेश से लौटे लोगों को ध्यान में रखकर उठाया गया। कई मामलों में जानकारी के अभाव या तकनीकी चूक के चलते विदेशी एसेट्स का खुलासा नहीं हो पाया। ऐसे लोगों को अब 6 महीने की एक बार की विंडो दी जाएगी, जिसमें वे बिना किसी आपराधिक कार्रवाई के अपनी स्थिति को नियमित कर सकेंगे।

सरकार ने इस स्कीम को दो कैटेगरी में बांटा है। इसमें एक कैटेगरी-ए और दूसरी कैटेगरी-बी है।

कैटेगरी-ए उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जिन्होंने अब तक किसी भी विदेशी आय या संपत्ति का खुलासा नहीं किया। अगर उनकी अघोषित विदेशी संपत्ति या आय 1 करोड़ रुपये तक है, तो वे इस स्कीम में शामिल हो सकते हैं। उन्हें संपत्ति के फेयर मार्केट वैल्यू या आय पर 30% टैक्स और 30 फीसदी पेनल्टी देनी होगी। इसके बदले उन्हें अभियोजन से पूरी छूट मिलेगी। इस अवधि के लिए कोई ब्याज भी नहीं लिया जाएगा।

कैटेगरी-बी उन लोगों के लिए है, जिन्होंने आंशिक रूप से खुलासा किया था। यानी कुछ विदेशी आय पर टैक्स दिया लेकिन कुछ संपत्तियों की जानकारी नहीं दी। अगर उनकी अघोषित संपत्ति 5 करोड़ रुपये तक है, तो उन्हें सिर्फ 1 लाख रुपये की एकमुश्त फीस देनी होगी। इसके बाद उन्हें पेनल्टी और केस से राहत मिलेगी।

मार्केट एक्सपर्ट सोनम श्रीवास्तव का मानना है कि यह स्कीम रेवेन्यू जुटाने से ज्यादा सिस्टम को साफ करने की कोशिश है। इससे न सिर्फ टैक्सपेयर्स का डर कम होगा, बल्कि भारत की ग्लोबल टैक्स ट्रांसपेरेंसी भी मजबूत होगी। खासतौर पर ESOPs, विरासत में मिली संपत्तियों और छोटे विदेशी अकाउंट रखने वालों को इससे राहत मिलेगी। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि असली परीक्षा 6 महीने बाद होगी। अगर इसके बाद जांच और सिस्टम ज्यादा सख्त और ऑटोमेटेड हुआ, तो यह स्कीम टैक्स अनुपालन की आदत बदल सकती है।

(प्रियंका कुमारी)

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