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Digital Transaction: आरबीआई कहता है कि ग्राहकों अपने कार्ड डिटेल, पासवर्ड, पिन, ओटीपी, सीवीवी, यूपीआई-पिन आदि किसी के साथ भी शेयर न करें और डिजिटल लेनदेन के वक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

RBI measures for Digital Transaction: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आम नागरिकों के बीच सुरक्षित डिजिटल लेनदेन (Digital Transaction) को बढ़ावा देने के लिए नई जानकारी साझा की है। केंद्रीय बैंक ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए 8 अहम उपाय बताए हैं। साथ ही दोहराया है कि यूजर्स यानी ग्राहकों को अपने कार्ड डिटेल, पासवर्ड, पिन, ओटीपी, सीवीवी, यूपीआई-पिन आदि किसी के साथ भी शेयर नहीं करनी चाहिए और डिजिटल लेनदेन के दौरान पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

बीएलएस ई-सर्विसेज के चीफ शिखर अग्रवाल ने कहा, "यूजर्स अपने मोबाइल, ई-मेल, इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट या पर्स पर महत्वपूर्ण बैंकिंग डेटा स्टोर न करें। साथ ही पब्लिक या फ्री वाई-फाई नेटवर्क से जुड़कर वित्तीय लेनदेन करने से बचें।"

ग्राहकों की जागरुकता के लिए RBI चला रहा है कैंपेन
आरबीआई की ओर से सभी बैंकों और फाइनेंशियल ऑर्गनाइजेशंस को कस्टमर्स के डेटा की सीक्रेसी और सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। रिज़र्व बैंक (RBI) डिजिटल भुगतान में सुरक्षा नियंत्रण पर काफी जोर दे रहा है। केंद्रीय बैंक ने डिजिटल, प्रिंट और ऑडियो-विज़ुअल मीडिया में अपना प्रमुख जागरुकता कैंपेन "आरबीआई कहता है" का प्रचार प्रसार कराया है। इसके जरिए कई तरह से ग्राहकों को तकनीक से अवेयर किया जा रहा है। 

आरबीआई ने डिजिटल लेनदेन को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए बैंकों ये उपाय (RBI measures) करने के लिए कहा है। 
1) किसी नए यूजर को पेमेंट के लिए जोड़ने के दौरान सेंकेंड्री चैनल से विशेष OTP की जरूरत होती है, जिससे पेमेंट प्रोसेस ज्यादा सेफ होगी।
2) अहम फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के लिए सुरक्षा मजबूत करने और बड़े लेनदेन के लिए नए ओटीपी की आवश्यकता होती है।
3) ट्रांजैक्शन के दौरान मिस यूज की आशंका को कम करने के लिए ओटीपी की टाइम लिमिट को बारीकी से मॉनीटर किया जाता है।
4) अनधिकृत लेनदेन की पहचान करने और रोकने के लिए डिजिटल सिग्नेचर और कीबोर्ड-बेस्ड मैसेज अथॉन्टिकेशन कोड (KMAC) का यूज करें।
5) ग्राहकों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में शामिल उनके अधिकारों, इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी जिम्मेदारियों और जोखिमों के बारे में जानकारी देना।
6) वैल्यू के हिसाब से अधिक ट्रांजैक्शन की लिमिट को लेकर ग्राहकों को वैकल्पिक तरीकों के बारे में बताया जाए।
7) यूजर्स को फ़िशिंग से बचने के लिए SSL या ईवी-SSL सर्टिफिकेट को लेकर मिले अलर्ट के बारे में बताएं।
8) ग्राहकों के लेनदेन पैटर्न के आंकलन और असमान्य एक्टिविटीज चिह्नित करने के लिए सिस्टम तैयार हो। इससे पता चलेगा कि लेनदेन यूजर के बिहेवियर से अलग है।

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