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Lok Sabha Election 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इस बार 7 चरणों में मतदान के बाद 4 जून को नतीजों का ऐलान होना है।

Lok Sabha Election 2024: देश में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 7 चरणों में वोटिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल के लिए आक्रामक प्रचार में जुटे हैं। देश में चुनावी माहौल के बीच घरेलू इक्विटी एडवाइजरी फर्म फिडेलफोलियो ने शेयर बाजार पर चुनाव के असर का एनालिसिस किया है। इसमें सामने आया है कि मौजूदा आम चुनावों और इसके नतीजे का इक्विटी मार्केट पर कोई बड़ा दीर्घकालिक प्रभाव नहीं होगा।

निफ्टी इंडेक्स 30,000 से 35,000 पहुंच सकता है: रिपोर्ट 
फिडेलफ़ोलियो की रिपोर्ट "डिसिफ़रिंग मार्केट ट्रेंड्स: नेविगेटिंग प्री-इलेक्शन डायनेमिक्स एंड ग्लोबल टर्बुलेंस" में स्टॉक मार्केट को लेकर बड़े दावे किए हैं। इसके मुताबिक, कुछ अपवादों को छोड़कर निफ्टी इंडेक्स ने आमतौर पर चुनाव अवधि के आसपास ऊपर की ओर रुख किया है। रिपोर्ट में अगले 3 साल में Nifty 50 Index के 30,000 से 35,000 अंक के बीच पहुंचने का अनुमान है। बीते 30 साल में निफ्टी इंडेक्स ने बाजार की चुनौतियों और अस्थिरता के बावजूद करीब 13% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) प्रदान करते हुए लचीलेपन का प्रदर्शन किया है।

फिडेलफोलियो के फाउंडर ने बयान में क्या कहा?
फिडेलफोलियो के स्मॉलकेस के मैनेजर और फाउंडर किसलय उपाध्याय ने कहा- देश एक अहम चुनाव के लिए तैयार है, निवेशक बड़ी उत्सुकता से मार्केट के प्रदर्शन पर नजर टिकाए बैठे हैं। सोच रहे हैं कि क्या यह चुनाव पूर्व रैली या सुधार का गवाह बनेगा। हालांकि, ग्लोबल लेवल पर विपरीत तस्वीर नजर आ रही है। मिडिल ईस्ट में अशांति, रूस-यूक्रेन संघर्ष और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के खराब आर्थिक संकेत भारतीय शेयर बाजार पर असर डाल सकते हैं। बता दें कि 1996 से 1998 तक की सबसे कमजोर गठबंधन सरकार के दौरान राजनीतिक अस्थिरता के बाद भी निफ्टी इंडेक्स ने थोड़ा पॉजिटिव रिटर्न दिया था। इस ऐतिहासिक माहौल से चुनाव से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद इक्विटी बाजार के लिए एक मजबूत दीर्घकालिक रुख का पता चलता है।

पिछले 4 आम चुनावों में मार्केट ने दोहरे अंकों में दिया रिटर्न 
इस बार लोकसभा चुनाव प्रक्रिया 19 अप्रैल से शुरू होकर 44 दिनों तक चलेगी, जो 1 जून को सातवें चरण के मतदान के साथ समाप्त होगी। इसके बाद 4 जून को देश में नई सरकार की स्थिति साफ हो जाएगी। हर पांच साल में यह प्रक्रिया भारतीय नागरिकों के लिए काफी मायने रखती है, क्योंकि यह उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करती है। जिसमें उनकी बचत और निवेश भी शामिल है। चुनाव नतीजे आर्थिक नीतियों और मार्केट सेंटिमेंट्स को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे यह देश की भविष्य की दिशा के लिए एक महत्वपूर्ण घटना बन जाएगी। पिछले चार आम चुनावों में बाजार ने दोहरे अंक में रिटर्न दिया है।

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