India's New Series GDP: भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 7.6% की रफ्तार से बढ़त दर्ज की। यह आंकड़ा सरकार ने 27 फरवरी को नई जीडीपी सीरीज के तहत जारी किया। पिछले साल यानी वित्तीय वर्ष 2025 में ग्रोथ 7.1 प्रतिशत रही।
सरकार ने जीडीपी की गिनती का तरीका बदला है और अब 2022-23 को नया बेस ईयर माना है। पहले 2011-12 को बेस ईय़र माना जाता था। नए तरीके से हिसाब लगाने पर वित्तीय वर्ष 2026 की ग्रोथ 7.4 प्रतिशत से बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो गई। सरकार का कहना है कि अब ज्यादा कंपनियों के आंकड़े जोड़े गए हैं और हिसाब लगाने का तरीका भी सुधारा गया है। इससे अर्थव्यवस्था की तस्वीर ज्यादा साफ दिखती है।
पुराने सालों के आंकड़े भी बदले गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025 की ग्रोथ पहले 6.5 प्रतिशत बताई गई थी, अब इसे बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2024 की ग्रोथ नई गिनती में 7.2 प्रतिशत है, जबकि पुराने तरीके में यह 9.2 प्रतिशत बताई गई थी।
तिमाही आंकड़े भी सामने आए हैं। पहली तिमाही में 6.7 प्रतिशत, दूसरी में 8.4 प्रतिशत और तीसरी में 7.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। यानी पूरे साल अर्थव्यवस्था की चाल ठीक-ठाक बनी रही। लेकिन इस बदलाव का असर सिर्फ ग्रोथ के आंकड़ों तक नहीं है। इससे सरकार के खर्च और घाटे की गणना पर भी फर्क पड़ेगा।
रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि नए बेस ईयर के बाद देश की कुल जीडीपी का आकार पहले के मुकाबले थोड़ा छोटा दिख रहा। फाइनेंशियल ईयर 2024 और 2025 की नॉमिनल जीडीपी पुराने अनुमान से करीब 3.8 फीसदी कम है। FY26 के लिए भी यह करीब 3.3 प्रतिशत कम आंकी गई है।
इसका सीधा मतलब यह है कि राजकोषीय घाटा जीडीपी के मुकाबले थोड़ा ज्यादा दिखेगा। यानी जो घाटा पहले कम लगता था, अब वह थोड़ा ज्यादा नजर आ सकता। अनुमान है कि यह 15-20 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकता है।
वित्तीय वर्ष 2027 के लिए सरकार ने बजट में 4.3 प्रतिशत का घाटा लक्ष्य रखा है, लेकिन नए आंकड़ों के हिसाब से यह करीब 4.46 प्रतिशत तक जा सकता है। इसी तरह कर्ज का अनुपात भी पहले के अनुमान से ज्यादा दिख सकता है। सीधी बात यह है कि नई गिनती में अर्थव्यवस्था की रफ्तार थोड़ी बेहतर दिख रही है, लेकिन सरकार के लिए खर्च और कर्ज संभालना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
(प्रियंका कुमारी)