Stock market today opening: हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खराब रही। सोमवार को बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, जिसे 'ब्लैक मंडे' कहा जा रहा। बीएसई सेंसेक्स करीब 1600 अंकों से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी में भी 2 फीसदी से ज्यादा गी गिरावट दर्ज की गई।
सुबह 10 बजे के आसपास सेंसेक्स 1612 अंकों की गिरावट के साथ 72920 पर और निफ्टी 513 अंक गिरकर 22600 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। बाजार में गिरावट का दायरा भी काफी बड़ा रहा, जहां करीब 2990 शेयरों में गिरावट आई जबकि सिर्फ 592 शेयर ही बढ़त में रहे।
कच्चे तेल की कीमतों ने तोड़ा बाजार
इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें सबसे अहम कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है, जो भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। महंगा तेल सीधे महंगाई बढ़ाता है, रुपये को कमजोर करता है और विदेशी निवेशकों को बाजार से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करता है।
एफआईआई की लगातार बिकवाली
दूसरा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। मार्च महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) हर दिन बिकवाली करते नजर आए हैं। 20 मार्च तक करीब 90152 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रुपये की कमजोरी और तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।
बाजार में डर का माहौल भी साफ दिख रहा है। इंडिया विक्स यानी वोलैटिलिटी इंडेक्स करीब 15% बढ़कर 26 के स्तर पर पहुंच गया है, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
जियो पॉलिटिकल टेंशन से बाजार धराशायी
चौथा बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव है। होर्मुज की खाड़ी को लेकर ईरान की चेतावनी ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका उसके पावर प्लांट्स पर हमला करता है, तो वह इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह बंद कर सकता है। यह रास्ता दुनिया की बड़ी तेल सप्लाई का केंद्र है, ऐसे में इसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ना तय है।
पांचवां कारण वैश्विक संकेतों की कमजोरी है। एशियाई बाजारों में भी 3% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव के चलते निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया के बाजारों पर दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रहने का समय है, क्योंकि वैश्विक हालात का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ रहा है।
(प्रियंका कुमारी)