Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। आईटी शेयरों में भारी बिकवाली और कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते सेंसेक्स 558.72 अंक यानी 0.66% गिरकर 83674.92 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 146.65 अंक यानी 0.57% लुढ़ककर 25807.20 के स्तर पर आ गया। पूरे दिन बाजार दबाव में रहा और ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।
निफ्टी-50 में टेक महिंद्रा, इंफोसिस और विप्रो सबसे बड़े गिरने वाले शेयर रहे, जिनमें करीब 5% तक की कमजोरी देखने को मिली। दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसे कुछ शेयरों में 2% तक की बढ़त भी दर्ज की गई। मार्केट ब्रेड्थ भी कमजोर रही। करीब 1468 शेयरों में तेजी रही जबकि 2011 शेयर गिरावट में बंद हुए और 175 शेयर बिना बदलाव के रहे।
बाजार की गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों की तेज बिकवाली रही। जनवरी के अमेरिकी जॉब डेटा उम्मीद से बेहतर आने के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा जल्द ब्याज दर कटौती की संभावना कम हो गई। इसके चलते वॉल स्ट्रीट में आईटी शेयर टूटे और उसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ा। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बदलावों को लेकर निवेशकों की चिंता भी बढ़ी है। निफ्टी आईटी इंडेक्स 4 फीसदी से ज्यादा गिरकर दिन का सबसे कमजोर सेक्टर रहा।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आईटी सेक्टर के सामने खड़ी असली चुनौतियों का संकेत भी है। रिपोर्ट्स के अनुसार एआई ऑटोमेशन से भारतीय आईटी कंपनियों के लेबर-आधारित मॉडल पर असर पड़ सकता। साल 2025 में 12.6 फीसदी गिरने के बाद 2026 में भी आईटी इंडेक्स करीब 11% टूट चुका है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 0.46% बढ़कर 69.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महंगा तेल महंगाई और व्यापार घाटे का खतरा बढ़ाता है।
ग्लोबल मार्केट से भी संकेत कमजोर रहे। हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स गिरावट में था, जबकि अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में लाल निशान में बंद हुए थे। कुल मिलाकर निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ।
(प्रियंका कुमारी)
