नई दिल्ली। भारत की थोक महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) फरवरी महीने में बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई है। इससे पहले जनवरी में यह दर 1.81 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक महंगाई में यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र, बेसिक मेटल, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य सामग्री और वस्त्रों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है। थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई फरवरी में बढ़कर 158.2 पर पहुंच गया, जबकि जनवरी में यह 157.8 था। इससे संकेत मिलता है कि उत्पादन और थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। मासिक आधार पर देखें तो फरवरी में डब्ल्यूपीआई में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी जनवरी में दर्ज 0.38 प्रतिशत की तुलना में थोड़ी कम रही।
प्राथमिक वस्तुओं में गिरावट, सालाना महंगाई बढ़ी
इसका मतलब है कि कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी रफ्तार पहले के महीने के मुकाबले थोड़ी धीमी हो गई है। थोक महंगाई की गणना में शामिल प्राथमिक वस्तुओं के सूचकांक में फरवरी के दौरान थोड़ी गिरावट देखने को मिली। इस श्रेणी का कुल भार लगभग 22.62 प्रतिशत है। फरवरी में यह सूचकांक घटकर 192.9 पर आ गया, जबकि जनवरी में यह 193.9 था। इस दौरान खाद्य वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में कमी दर्ज की गई। हालांकि कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके बावजूद साल-दर-साल आधार पर इस श्रेणी में महंगाई बढ़कर 3.27 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 2.21 प्रतिशत थी।
ईंधन और बिजली श्रेणी अभी भी नकारात्मक
खाद्य वस्तुओं से जुड़े थोक मूल्य सूचकांक में फरवरी में माह-दर-माह आधार पर गिरावट दर्ज की गई। यह सूचकांक जनवरी के 194.2 से घटकर फरवरी में 192.9 रह गया। हालांकि सालाना आधार पर खाद्य महंगाई में वृद्धि हुई है। फरवरी में खाद्य महंगाई 1.85 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह 1.41 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि सालभर की तुलना में खाद्य कीमतों में हल्की तेजी बनी हुई है। ईंधन और बिजली से जुड़े सूचकांक में फरवरी के दौरान कुछ बढ़ोतरी देखी गई। इस श्रेणी का भार लगभग 13.15 प्रतिशत है। फरवरी में यह सूचकांक बढ़कर 147.6 हो गया, जबकि जनवरी में यह 145.9 था। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खनिज तेलों की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई।
विनिर्माण ने सबसे ज्यादा बढ़ाई महंगाई
वहीं बिजली की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सालाना आधार पर इस श्रेणी में महंगाई अभी भी नकारात्मक बनी हुई है और यह -3.78 प्रतिशत दर्ज की गई है। थोक महंगाई में सबसे बड़ा योगदान विनिर्माण क्षेत्र का रहा है, जिसका कुल भार 64.23 प्रतिशत है। फरवरी में इस श्रेणी का सूचकांक 0.47 प्रतिशत बढ़कर 148.2 हो गया। कुल 22 विनिर्माण समूहों में से 16 समूहों में कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जबकि पांच समूहों में गिरावट दर्ज की गई। जिन क्षेत्रों में कीमतें बढ़ीं उनमें अन्य विनिर्माण उत्पाद, खाद्य उत्पाद, वस्त्र, विद्युत उपकरण और रसायन उत्पाद शामिल हैं। वहीं कुछ क्षेत्रों जैसे बेसिक मेटल, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, फैब्रिकेटेड मेटल उत्पाद, लकड़ी के उत्पाद और चमड़े से जुड़े उत्पादों में कीमतों में कमी दर्ज की गई।