भारत ने 6 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीदा, मिडिल ईस्ट संकट के बीच सप्लाई मजबूत करने के लिए उठाया बड़ा कदम। अमेरिकी छूट के बाद फिर बढ़ी रूस से खरीदी।

India Buy Russian Oil: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ा कदम उठाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने अगले महीने की डिलीवरी के लिए करीब 6 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद लिया। इससे सप्लाई को लेकर बनी चिंता काफी हद तक कम हुई।

जानकारी के अनुसार, यह खरीदारी ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 5 से 15 डॉलर प्रति बैरल प्रीमियम पर की गई। दिलचस्प बात यह है कि यह मात्रा मार्च महीने की खरीद के बराबर है, लेकिन फरवरी की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा। डेटा एनालिटिक्स फर्म केपलेर के मुताबिक, यह तेजी बताती है कि भारत फिर से रूसी तेल की ओर झुक रहा है।

भारत ने रूस से खरीदा 6 करोड़ बैरल तेल
दरअसल, इस खरीदारी के पीछे अमेरिका की ओर से दी गई छूट बड़ी वजह मानी जा रही। इस छूट के तहत भारत को उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने की अनुमति मिली, जो 5 मार्च से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे। बाद में इस नियम को और बढ़ाया गया, जिससे 12 मार्च से पहले समुद्र में मौजूद तेल को भी खरीदा जा सके।

होर्मुज पर गतिरोध जारी
मिडिल ईस्ट में युद्ध और खासकर होर्मुज की खाड़ी में रुकावट के चलते वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ा है। यही कारण है कि भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह छूट राहत लेकर आई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में सप्लाई का स्थिर रहना बेहद जरूरी है।

युक्रेन युद्ध के बाद से रूस से तेल खरीद रहा भारत
यूक्रेन युद्ध के बाद 2022 से भारत ने सस्ते रूसी तेल की खरीद बढ़ाई थी। हालांकि, पिछले साल के अंत में अमेरिका के दबाव के चलते भारत ने रूसी तेल खरीद में कमी की और सऊदी अरब व इराक से ज्यादा तेल लेना शुरू किया। लेकिन मौजूदा संकट में फिर से रूसी तेल की मांग बढ़ती दिख रही है।

सूत्रों के मुताबिक, मैंगलोर रिफाइनरी और हिंदुस्तान मित्तल एनर्जी जैसी कंपनियां, जिन्होंने दिसंबर के बाद रूसी तेल से दूरी बना ली थी, अब दोबारा बाजार में लौट आई। इसके अलावा भारत सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए दूसरे विकल्प भी तलाश रहा है।

वेनेजुएला से भी तेल खरीदेगा भारत
इसी कड़ी में अप्रैल के लिए वेनेजुएला से करीब 80 लाख बैरल तेल खरीदने का अनुमान है, जो अक्टूबर 2020 के बाद सबसे ज्यादा है। इससे साफ है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए हर संभव विकल्प पर काम कर रहा है।

वहीं, इस बढ़ती मांग का फायदा रूस को भी मिल रहा है। ऊंची कीमतों और ज्यादा बिक्री के चलते रूस की तेल कमाई मार्च 2022 के बाद सबसे ज्यादा स्तर पर पहुंच गई है।

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत ने समय रहते रणनीति बदलकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने की कोशिश की है, जिससे आने वाले समय में सप्लाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

(प्रियंका कुमारी)