Income tax rule: 1 अप्रैल से भारत के टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा। नए वित्त वर्ष के साथ ही इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू हो जाएगा, जो करीब 60 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। नए कानून के साथ टैक्स नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनका असर सीधे आम टैक्सपेयर्स की जेब और फाइनेंशियल प्लानिंग पर पड़ेगा।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक नया कानून टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल बनाने के उद्देश्य से लाया गया। इसमें भाषा को आसान किया गया है, कई पुराने और अप्रासंगिक प्रावधान हटाए गए हैं और प्रक्रियाओं को भी ज्यादा स्पष्ट बनाया गया है।
टैक्स ईयर शब्द का अब होगा इस्तेमाल
नए कानून के तहत एक बड़ा बदलाव टैक्स ईयर की शुरुआत है। अभी तक टैक्स से जुड़े मामलों में 'फाइनेंशियल ईयर' और 'असेसमेंट ईयर' शब्द इस्तेमाल होते थे। अब इन दोनों की जगह एक ही शब्द 'टैक्स ईयर' इस्तेमाल किया जाएगा ताकि सिस्टम ज्यादा सरल और समझने में आसान हो सके।
हालांकि व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए राहत की बात यह है कि पुराने और नए टैक्स रिजीम के तहत जो टैक्स स्लैब लागू हैं, उनमें फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
ITR फाइल करने की तारीख बदलेगी
आईटीआर फाइल करने की तारीखों में भी बदलाव किया गया। नए नियमों के तहत साधारण रिटर्न फाइल करने वाले व्यक्ति 31 जुलाई तक ITR-1 और ITR-2 दाखिल कर सकेंगे। जिन लोगों की बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम है लेकिन ऑडिट की जरूरत नहीं है, उनके लिए आखिरी तारीख 31 अगस्त होगी। कंपनियों और ऑडिट वाले मामलों के लिए 31 अक्टूबर तक रिटर्न फाइल किया जा सकेगा। वहीं कुछ विशेष मामलों में अंतिम तारीख 30 नवंबर रखी गई है। ये नई डेडलाइन टैक्स ईयर 2026-27 से लागू होंगी।
रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा
रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने के लिए भी अब ज्यादा समय मिलेगा। पहले इसकी सीमा 9 महीने थी, जिसे बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है। हालांकि अगर कोई टैक्सपेयर 9 महीने के बाद रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करता है तो उसे फीस देनी होगी। पांच लाख तक आय वाले लोगों के लिए यह फीस 1000 रुपये और उससे ज्यादा आय वालों के लिए 5000 रुपये होगी।
1 अप्रैल से STT ज्यादा देना होगा
1 अप्रैल से सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT की दरों में भी बढ़ोतरी होगी। ऑप्शंस बेचने पर STT 0.10% से बढ़कर 0.15% हो जाएगा। ऑप्शन एक्सरसाइज करने पर टैक्स 0.125% से बढ़कर 0.15% होगा। वहीं फ्यूचर्स की बिक्री पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया जाएगा।
विदेश भेजे जाने वाले पैसे यानी LRS के तहत भी TCS दरों में बदलाव होगा। शिक्षा और मेडिकल खर्च के लिए 10 लाख रुपये से ज्यादा रकम भेजने पर TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। हालांकि अन्य उद्देश्यों के लिए यह दर 20% ही रहेगी। विदेशी टूर पैकेज पर भी अब 2% का समान TCS लागू होगा।
शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि कैपिटल गेन माना जाएगा
कंपनियों के शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को अब डिविडेंड की बजाय कैपिटल गेन माना जाएगा और उसी के अनुसार टैक्स लगेगा। सोवरेन गोल्ड बॉन्ड को लेकर भी बदलाव हुआ है। टैक्स छूट सिर्फ उन बॉन्ड्स पर मिलेगी जो मूल इश्यू प्राइस पर खरीदे गए हैं। सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड्स पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।
एक राहत यह भी है कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले मुआवजे के ब्याज पर अब कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा और इस पर TDS भी नहीं कटेगा।
नए कानून में ऑफिस आने-जाने के खर्च को लेकर भी राहत दी गई है। अगर कंपनी कर्मचारी को ट्रांसपोर्ट सुविधा देती है या यात्रा का खर्च देती है तो उसे अब टैक्सेबल परक्विजिट नहीं माना जाएगा। इसके अलावा नॉन-रेजिडेंट से प्रॉपर्टी खरीदने पर टीडीएस काटने की प्रक्रिया भी आसान कर दी गई है। अब खरीदार अपने PAN के जरिए ही TDS जमा कर सकेगा और टैन लेने की जरूरत नहीं होगी।
(प्रियंका कुमारी)