वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया है। यह जनवरी के अनुमान से 0.1 प्रतिशत अधिक है। साथ ही आईएमएफ का मानना है कि वित्तवर्ष 28 में भी भारत की विकास दर 6.5% पर स्थिर बनी रहेगी। हालांकि, आईएमएफ ने बुधवार को वाशिंगटन में हुई बैठक में मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम बताया है। वैश्विक वित्तीय निकाय ने चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव से महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
भारत की मजबूती के पीछे क्या हैं वजहें
आईएमएफ के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। इसका मुख्य कारण 2025 से मिल रही मजबूत आर्थिक गति है। साथ ही घरेलू मांग में लगातार मजबूती बनी हुई है। अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर टैरिफ घटाने से भी राहत मिली है। पहले जहां 50% अतिरिक्त टैरिफ था, उसे घटाकर 10% कर दिया गया है। इन सकारात्मक कारकों ने वैश्विक जोखिमों के असर को काफी हद तक संतुलित किया है। आईएमएफ ने अपनी वर्ल्ड इकनाामिक आउटलुक रिपोर्ट और ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है। रिपोर्ट का शीर्षक है ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स कॉन्फ्रंट द वार इन द मिडल ईस्ट एंड एम्लीफिकेशन रिस्क्स।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं का ग्रोथ अनुमान घटाया
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 में भारत की ग्रोथ में हल्का सुधार देखने को मिलेगा। यह सुधार 2025 के बेहतर प्रदर्शन और बाहरी दबावों में कमी के कारण संभव है। आईएमएफ ने स्पष्ट किया कि भारत की वृद्धि दर 2027 तक स्थिर रह सकती है। यह संकेत देता है कि भारत अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। इससे व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय परिस्थितियों पर असर पड़ा है। उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ दर 2026 में घटकर 3.9% रहने का अनुमान है।
वैश्विक महंगाई पर बढ़ सकता है दबाव
आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में 2027 में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ दर सुधर कर 4.2% तक पहुंचने की उम्मीद जताई है। एशिया में भी आर्थिक रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। कमोडिटी आयात करने वाले देशों पर महंगाई का दबाव ज्यादा रहेगा। आईएमएफ के अनुसार वैश्विक महंगाई में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। 2025 में जहां महंगाई 4.1% थी, वहीं 2026 में यह बढ़कर 4.4% हो सकती है। हालांकि 2027 में इसके घटकर 3.7% होने का अनुमान है। इस बढ़ोतरी की वजह ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल है। आईएमएफ ने कहा कि महंगाई में यह वृद्धि अस्थायी हो सकती है। कुल मिलाकर, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक जोखिमों से पूरी तरह अछूती नहीं है।