सोना-चांदी में गुरुवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। डॉलर मजबूत और ब्याज दरों का दबाव कीमती धातु पर नजर आ रहा है। महंगाई, एफपीआई बिकवाली और मुनाफावसूली से बाजार कमजोर पड़ रहा।

Gold-Silver Price today: सर्राफा बाजार में 26 मार्च को बड़ी गिरावट देखने को मिली, जहां सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। घरेलू वायदा बाजार में सोना 2.43% गिरकर 140830 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया जबकि चांदी में इससे भी ज्यादा कमजोरी दिखी और यह 5.88% टूटकर 224605 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। 

राम नवमी के कारण दिन में बाजार बंद रहा और एमसीएक्स पर ट्रेडिंग शाम 5 बजे शुरू हुई, जिसके बाद यह गिरावट दर्ज की गई।

सोने और चांदी दोनों में गिरावट
इंटरनेशनल बाजार में भी यही रुख देखने को मिला। सुबह के सत्र में कीमतें मजबूत थीं, लेकिन बाद में हालात बदल गए। सोना करीब 2.76% गिरकर 4427 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया जबकि चांदी 6.99% टूटकर 67.56 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की रणनीति में बदलाव से बाजार पर दबाव बढ़ा।

बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के कारण दबाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे अहम वजह बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों की आशंका है। तेल और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई का दबाव बना हुआ है, जिससे ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद है।

ऐसे में सोना और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले निवेश कम आकर्षक हो जाते। इसके साथ ही सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग बढ़ने से वह मजबूत हुआ है, जिससे सोना-चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे हो जाते हैं और उनकी मांग घटती है।

एफआईआई की बिकवाली से भी गोल्ड पर भी दबाव बढ़ा
घरेलू स्तर पर भी स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण रुपया दबाव में है और यह डॉलर के मुकाबले 94.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। इसका असर भी बुलियन बाजार की धारणा पर पड़ा है। इसके अलावा हाल की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है, जिससे कीमतों में और गिरावट आई।

चांदी पर अतिरिक्त दबाव इसलिए भी है क्योंकि यह औद्योगिक धातु है और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका से इसकी मांग प्रभावित हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, बॉन्ड यील्ड, डॉलर की चाल, महंगाई के आंकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए रखें। जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार के संकेतों को समझकर ही निवेश करना बेहतर रहेगा।

(प्रियंका कुमारी)