वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान घटाकर 3.1% कर दिया है। वाशिंगटन में बैठक के दौरान आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गोरिनचास ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते ऊर्जा और कमोडिटी कीमतों में उछाल आया है, जिससे वैश्विक आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया इस समय सामान्य और खराब परिदृश्य के बीच खड़ी है। उन्होंने आगाह किया कि अगर हालात नहीं सुधरे तो जोखिम बहुत तेजी से बढ़ सकता है। ईरान युद्ध की पृष्ठभूमि में हो रही यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री गोरिनचास ने कहा अगर ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन बाधाएं बढ़ती हैं तो जोखिम और गहरा जाएगा।
और धीमी हो सकती है चीन की अर्थव्यवस्था
उन्होंने कहा यह नीति-निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। बैठक में आईएमएफ ने 2026 के लिए चीन की विकास दर 4.4% रहने का अनुमान जताया है। यह जनवरी के अनुमान से थोड़ा कम है। ऊर्जा और कमोडिटी की बढ़ती कीमतों का असर चीन पर भी पड़ रहा है। हालांकि अमेरिकी टैरिफ में कमी और सरकारी प्रोत्साहन से कुछ राहत मिल रही है। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री और ख्यात फ्रेंच अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गोरिनचास ने कहा कि 2027 में चीन की अर्थव्यवस्था और धीमी हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि चीन को निर्यात से हटकर घरेलू खपत पर ध्यान देना चाहिए।
विकासशील देशों की 3.9% रहेगी विकास दर
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के उपयोग पर टोल लगाने का विचार रखा है। यह मार्ग युद्ध शुरू होने के बाद से काफी हद तक प्रभावित है। अगर टोल लागू होता है तो इसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। हालांकि आईएमएफ ने उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभावों का अभी विस्तृत अध्ययन नहीं किया है। गोरिनचास ने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है। ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों में बाधा से जोखिम बढ़ता जा रहा है। आईएमएफ ने उभरते बाजारों और विकासशील देशों के लिए विकास दर का अनुमान घटाकर 3.9% कर दिया है। पहले यह अनुमान 4.2% रखा था। यह गिरावट विकसित देशों की तुलना में अधिक है। कारण है कि ये देश तेल के झटकों और मुद्रा कमजोरी के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
महंगाई और आर्थिक संतुलन की चुनौती
गोरिनचास ने कहा उभरते बाजारों और विकासशील देशों के लिए निवेश में उतार-चढ़ाव का असर ज्यादा पड़ता है। युद्ध का प्रभाव हर देश पर उसकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग होगा। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष नई आर्थिक चुनौतियां पैदा कर रहा है। विभिन्न देशों की सरकारों को महंगाई नियंत्रित करने और विकास बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना होगा। बढ़ती जीवन-यापन लागत से प्रभावित लोगों की मदद भी जरूरी होगी। साथ ही वित्तीय संतुलन बनाए रखना भी चुनौती रहेगा। कमजोर अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों पर सबसे ज्यादा खतरा है। उच्च आयात बिल, कमजोर मुद्रा और कम निवेश से संकट और गहरा सकता है।