फिक्स्ड डिपॉजिट और पीपीएफ दोनों सुरक्षित निवेश हैं, लेकिन मकसद अलग है। एफडी शॉर्ट टर्म और फ्लेक्सिबिलिटी के लिए बेहतर है जबकि पीपीएफ लॉन्ग टर्म और टैक्स सेविंग के लिए ज्यादा फायदेमंद है।

FD vs PPF: पैसे बचाने और बढ़ाने की बात आती है तो ज्यादातर लोग दो विकल्पों के बीच उलझ जाते हैं- फिक्स्ड डिपॉजिट और पब्लिक प्रोविडेंट फंड। दोनों ही भारत में बेहद लोकप्रिय निवेश विकल्प हैं, लेकिन इनका मकसद और फायदा अलग-अलग होता। सही चुनाव आपके लक्ष्य और जरूरत पर निर्भर करता।

ब्याज दर और रिटर्न का क्या?
फिक्स्ड डिपॉजिट में आपको तय समय के लिए फिक्स्ड ब्याज मिलता, जो 1 महीने से लेकर 10 साल तक के लिए हो सकता। इसमें रिटर्न पहले से तय होता, इसलिए यह सुरक्षित निवेश माना जाता। वहीं पीपीएफ में ब्याज दर सरकार तय करती और यह सालाना कंपाउंड होती है। इसकी दर एफडी से थोड़ी कम हो सकती लेकिन यह पूरी तरह सरकारी गारंटी के साथ आती।

टेन्योर और पैसे निकालने की सुविधा
फिक्स्ड डिपॉजिट की सबसे बड़ी खासियत इसका लचीलापन है। आप अपनी जरूरत के हिसाब से छोटी या लंबी अवधि के लिए निवेश कर सकते। जरूरत पड़ने पर प्रीमैच्योर विड्रॉल भी कर सकते हैं, हालांकि इसके लिए पेनल्टी देनी पड़ती है। दूसरी ओर, पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। यह लंबी अवधि का निवेश है और रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेहतर माना जाता है। हालांकि कुछ शर्तों के साथ 5 साल बाद आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है।

टैक्स बेनिफिट में कौन आगे?
पीपीएफ टैक्स के मामले में काफी फायदेमंद है। इसमें निवेश पर सेक्शन 80-सी के तहत छूट मिलती है और मिलने वाला ब्याज भी पूरी तरह टैक्स-फ्री होता। फिक्स्ड डिपॉजिट में ऐसा नहीं है। सामान्य एफडी पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता। हालांकि 5 साल के टैक्स सेविंग एफडी पर 80C के तहत छूट मिलती है, लेकिन उस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में ही आता है।

एफडी और पीपीएफ दोनों को सुरक्षित निवेश माना जाता है। बैंक एफडी को DICGC के तहत एक तय सीमा तक बीमा मिलता है। वहीं पीपीएफ पूरी तरह सरकार द्वारा समर्थित है, इसलिए इसमें जोखिम लगभग नहीं के बराबर है। हालांकि फिक्स्ड डिपॉजिट में महंगाई का असर ज्यादा पड़ सकता है, जिससे असल रिटर्न कम हो सकता है।

अगर आप कम समय के लिए सुरक्षित और तय रिटर्न चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट आपके लिए बेहतर है। लेकिन अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में पैसा बढ़ाना और टैक्स बचाना है, तो पीपीएफ ज्यादा फायदेमंद विकल्प साबित हो सकता।

(प्रियंका कुमारी)