USA-Iran Conflict: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठा लिया जिसने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी। अमेरिका ने ईरान के बेहद अहम तेल निर्यात केंद्र खार्ग आइलैंड पर हमला कर दिया है। माना जा रहा है कि यह वही जगह है जिसे अब तक अमेरिका खुद भी 'रेड लाइन' मानता था और सीधे निशाना बनाने से बचता रहा था।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार तड़के (भारतीय समय) सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिकी सेना ने खार्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों पर बेहद शक्तिशाली बमबारी की। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मध्य-पूर्व के इतिहास की सबसे ताकतवर बमबारी में से एक को अंजाम दिया और 'ईरान के क्राउन ज्वेल' कहे जाने वाले खार्ग द्वीप के सभी सैन्य लक्ष्यों को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
यह हमला इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह छोटा सा कोरल द्वीप ईरान के तट से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है और यहीं से ईरान अपने लगभग 90 प्रतिशत तेल का निर्यात करता है। दशकों से इसे ईरान की सबसे संवेदनशील आर्थिक कमजोरी माना जाता रहा।
खार्ग आइलैंड क्यों अहम है?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर खार्ग द्वीप की तेल संरचना को बड़ा नुकसान होता है तो वैश्विक तेल बाजार पर भी सीधा असर पड़ेगा। एनर्जी एक्सपर्ट डैन पिकरिंग ने रॉयटर्स से कहा कि अगर खार्ग का इंफ्रास्ट्रक्चर ठप हो गया तो बाजार से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल की सप्लाई कम हो सकती है। इससे वैश्विक कीमतों में बड़ा उछाल आ सकत।
ईरान का 90 फीसदी तेल यहीं से निकलता
खार्ग द्वीप का महत्व उसकी भौगोलिक स्थिति से भी जुड़ा है। ईरान का अधिकांश तट उथला है, जहां दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर नहीं पहुंच सकते। लेकिन खार्ग के आसपास समुद्र गहरा है, इसलिए यहां विशाल टैंकर आसानी से तेल लोड कर सकते हैं। इसी वजह से 1960 के दशक में अमेरिकी कंपनी एमको ने यहां बड़ा तेल निर्यात टर्मिनल बनाया था।
आज यह द्वीप रोजाना लगभग 70 लाख बैरल तेल लोड करने की क्षमता रखता है और यहां करीब 3 करोड़ बैरल तक तेल स्टोर किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च की शुरुआत तक यहां करीब 1.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल मौजूद था।
चीन सबसे ज्यादा तेल ईरान से लेता
इस हमले से दुनिया इसलिए भी चिंतित है क्योंकि ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। चीन पहले ही मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईंधन की सप्लाई बचाने के लिए रिफाइंड फ्यूल के निर्यात पर रोक जैसे कदम उठा चुका है। ऐसे में खार्ग द्वीप पर हमले से चीन और अमेरिका के रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि ईरान ने दावा किया है कि हमले के बाद भी द्वीप पर तेल से जुड़ी गतिविधियां फिर से शुरू हो गई हैं और प्रमुख तेल सुविधाएं सुरक्षित हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला संघर्ष को खतरनाक स्तर तक ले जा सकता है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई से तनाव बढ़ सकता
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है तो वह खाड़ी देशों के तेल ढांचे को निशाना बना सकता है। ऐसी स्थिति में पूरी दुनिया में तेल सप्लाई और कीमतों पर बड़ा झटका लग सकता है। कुल मिलाकर खार्ग द्वीप पर हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीति के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
(प्रियंका कुमारी)