RERA insurance: घर खरीदने से पहले जान लें रेरा इंश्योरेंस का नियम, वरना भारी पड़ सकता नुकसान

RERA insurance home buying
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RERA insurance: रेरा की धारा 16 के तहत बिल्डर के लिए प्रोजेक्ट इंश्योरेंस अनिवार्य है। इंश्योरेंस न होने पर खरीदारों को बड़ा आर्थिक और कानूनी नुकसान हो सकता। खरीदार शिकायत, मुआवजा और पजेशन रोकने जैसे अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते।

RERA insurance: घर खरीदना हर किसी का सपना होता है लेकिन कई बार बिल्डर की छोटी-सी लापरवाही खरीदारों को बड़े नुकसान में डाल देती। हाल ही में कर्नाटक रेरा ट्रिब्यूनल में एक मामला सामने आया, जहां बिल्डिंग में आग लगने के बाद घर खरीदारों को इंश्योरेंस दस्तावेज नहीं मिले। जांच में पता चला कि बिल्डर ने रेरा की धारा 16 के तहत जरूरी इंश्योरेंस ही नहीं कराया था। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने बिल्डर को या तो इंश्योरेंस पेपर देने या मरम्मत का खर्च उठाने का आदेश दिया।

रेरा एक्ट 2016 की धारा 16 के मुताबिक, किसी भी प्रोजेक्ट की शुरुआत से पहले बिल्डर को जमीन के टाइटल और पूरे प्रोजेक्ट का इंश्योरेंस कराना जरूरी। यह पॉलिसी निर्माण पूरा होने और पजेशन मिलने तक चालू रहनी चाहिए। साथ ही, पजेशन के समय सभी इंश्योरेंस दस्तावेज और लाभ खरीदारों या एसोसिएशन को सौंपने होते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि खरीदारों के लिए सुरक्षा कवच। इससे आग, स्ट्रक्चरल डैमेज या टाइटल विवाद जैसे जोखिम कवर होते। रेरा की पांच साल की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि के साथ यह सुरक्षा और मजबूत हो जाती है। कर्नाटक रेरा का हालिया आदेश भी साफ करता कि यह नियम अनिवार्य है और पजेशन के बाद भी इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अगर बिल्डर इंश्योरेंस नहीं कराता तो खरीदारों को कई जोखिम झेलने पड़ सकते। उन्हें मरम्मत का खर्च खुद उठाना पड़ सकता या कानूनी लड़ाई में समय और पैसा खर्च करना पड़ सकता। खासकर जब बिल्डर आर्थिक रूप से कमजोर हो, तो नुकसान और बढ़ जाता है।

ऐसी स्थिति में खरीदार रेरा की धारा 31 के तहत शिकायत दर्ज कर सकते। अथॉरिटी बिल्डर को बाद में इंश्योरेंस कराने या नुकसान की भरपाई करने का आदेश दे सकती। साथ ही, उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत भी मुआवजा मांगने का अधिकार मिलता। खरीदार अंतिम भुगतान रोक सकते हैं या वैध इंश्योरेंस दस्तावेज मिलने तक पजेशन लेने से इनकार भी कर सकते हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदार पहले लिखित में इंश्योरेंस दस्तावेज मांगें, राज्य रेरा पोर्टल पर जानकारी जांचें और सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। अगर बिल्डर टालमटोल करे, तो तुरंत शिकायत दर्ज कर कार्रवाई शुरू करें। सही जानकारी और सतर्कता ही घर खरीदते समय सबसे बड़ी सुरक्षा है।

(प्रियंका कुमारी)

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