India–EU Trade Deal: भारत-ईयू के बीच ऐतिहासिक डील के क्या मायने? किन सेक्टर्स को मिलेगा फायदा?

India–EU free trade agreement
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India–EU free trade agreement: भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो गया।

India–EU Trade Deal: भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो गया। इससे वाइन, ऑलिव ऑयल और चॉकलेट जैसे यूरोपीय उत्पाद सस्ते होंगे। भारत के कृषि सेक्टर को इससे अलग रखा गया है। वहीं, भारत के टेक्सटाइल, लेदर, केमिकल सेक्टर की कंपनियों को इससे फायदा होगा।

India–EU Trade Deal: भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच 18 साल की लंबी चर्चा के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो गया। भारत और यूरोपियन यूनियन के नेताओं की मौजूदगी में इस डील पर साइन हुए। ये ट्रेड डील 2027 से लागू होगी। इस करार के बाद भारत में यूरोप की बड़ी कार कंपनियां जैसे मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी की कारों पर लगने वाले टैक्स को 110 फीसदी से घटाकर 10% कर दिया जाएगा। हालांकि, सरकार ने इसके लिए 2.5 लाख गाड़ियों की एनुअल लिमिट तय की है।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय बाजार में कई यूरोपीय खाद्य उत्पादों को सस्ता कर सकता। इस समझौते के तहत भारत वाइन, ऑलिव ऑयल और प्रोसेस्ड फूड जैसे एग्री-फूड प्रोडक्ट्स पर भारी-भरकम आयात शुल्क घटाने पर राजी हुआ। हालांकि, सरकार ने साफ किया कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को इस उदारीकरण से बाहर रखा जाएगा।

अभी कृषि सेक्टर को अलग रखा गया

यूरोपियन यूनियन के आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, इस डील का फोकस उन एग्री-फूड ड्यूटी पर है, जो फिलहाल औसतन 36 फीसदी से ज्यादा हैं। इसका मतलब है कि भारतीय बाजार को सोच-समझकर खोला जाएगा जबकि चावल, चीनी और मांस जैसे अहम घरेलू उत्पादों को सुरक्षा मिलती रहेगी।

उर्सुला वान डेर लेयेन ने कहा कि यह समझौता दुनिया को संदेश देता है कि वैश्विक चुनौतियों का सबसे अच्छा जवाब आपसी सहयोग है। इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत और यूरोप की सप्लाई चेन आपस में जुड़ेंगी। उन्होंने बताया कि इससे हर साल करीब 4 अरब यूरो (43 हजार करोड़ रुपए) के टैरिफ कम होंगे और भारत के साथ ही यूरोप में लाखों लोगों के लिए नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।

क्या होगा सस्ता?

समझौते के लागू होते ही वाइन पर आयात शुल्क 150 फीसदी से घटकर 75% हो जाएगा। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से और कम किया जाएगा, जो आगे चलकर 20 फीसदी तक आ सकता। ऑलिव ऑयल पर 45 फीसदी का शुल्क पांच साल में पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इसके अलावा, ब्रेड, बिस्किट, चॉकलेट और अन्य कन्फेक्शनरी जैसे प्रोसेस्ड एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स पर लगने वाले 50 फीसदी तक के टैरिफ भी हटाए जाएंगे। इससे यूरोप की वाइन, स्पिरिट्स, बीयर, ऑलिव ऑयल और मिठाइयों को भारतीय बाजार में खास बढ़त मिलेगी।

क्या रहेगा सुरक्षित?

भारत ने साफ कर दिया है कि कुछ कृषि उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी। बीफ, चिकन मीट, चावल और चीनी जैसे उत्पाद इस समझौते के दायरे से बाहर रहेंगे। यह फैसला किसानों और घरेलू बाजार के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया।

खाद्य सुरक्षा मानकों में कोई ढील नहीं

EU फैक्टशीट में यह भी कहा गया है कि समझौते के तहत आने वाले सभी आयात यूरोपियन यूनियन के सख्त हेल्थ और फूड सेफ्टी मानकों के अधीन रहेंगे। इन मानकों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

जियोग्राफिकल इंडिकेशन पर अलग बातचीत

भारत और EU जियोग्राफिकल इंडिकेशन को लेकर अलग समझौते पर भी बातचीत कर रहे हैं। इसका मकसद पारंपरिक यूरोपीय उत्पादों को भारत में बेहतर पहचान दिलाना और नकली उत्पादों पर रोक लगाना है।

EU ने बताया ऐतिहासिक समझौता

EU के कृषि और खाद्य आयुक्त क्रिस्टोफ हेंसन ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि इस डील से करीब 2 अरब लोगों के बाजार जुड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अब तक ऊंचे टैरिफ के चलते EU के एग्री-फूड एक्सपोर्ट भारत में सीमित थे, लेकिन इस समझौते से यूरोपीय उत्पादों को तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में खास पहुंच मिलेगी। साथ ही, संवेदनशील सेक्टर और फूड सेफ्टी से कोई समझौता नहीं किया गया है।

(प्रियंका कुमारी)

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