Term Insurance: एक कमाने वाले पर पूरी ज़िम्मेदारी, सिंगल इनकम फैमिली के लिए कितना टर्म इंश्योरेंस सही? जानें जरूरी बात

सिंगल इनकम परिवार के लिए टर्म इंश्योरेंस सबसे जरूरी और अहम सुरक्षा है।
Term Insurance: जिस परिवार की पूरी ज़िंदगी एक ही कमाई पर टिकी हो,वहां टर्म इंश्योरेंस कोई विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत है। घर का किराया या होम लोन की ईएमआई, बच्चों की स्कूल फीस,रोज़मर्रा का खर्च और बुज़ुर्ग माता-पिता की ज़िम्मेदारी- सबकुछ उसी एक सैलरी से चलता है। ऐसे में टर्म इंश्योरेंस कितना होना चाहिए,यह सवाल अक्सर बेचैन कर देता।
कम कवर लिया तो जोखिम,ज्यादा लिया तो साल-दर-साल प्रीमियम का बोझ। लेकिन सच यह है कि यह फैसला सिर्फ कैलकुलेशन का नहीं,समझदारी का है।
टर्म इंश्योरेंस का असली काम क्या?
अक्सर कहा जाता है कि टर्म इंश्योरेंस इनकम रिप्लेसमेंट है लेकिन यह पूरी सैलरी को जिंदगी भर के लिए बदलने का वादा नहीं करता। इसका असली मकसद परिवार को सांस लेने का समय देना है। अचानक हालात बदलने पर लोन चुकाने,घर चलाने,बच्चों की पढ़ाई जारी रखने और बिना घबराहट फैसले लेने का वक्त, यही टर्म इंश्योरेंस देता है।
10 या 15 गुना इनकम का फॉर्मूला क्यों अधूरा?
बहुत से लोग सालाना इनकम का 10 या 15 गुना कवर लेने की सलाह देते हैं। सुनने में आसान है लेकिन हर परिवार की हालत एक जैसी नहीं होती। एक किराए के घर में रहने वाला युवा और होम लोन,बच्चे व माता-पिता की ज़िम्मेदारी उठाने वाला व्यक्ति, दोनों की ज़रूरतें अलग हैं। सिर्फ इनकम या सिर्फ लोन देखकर लिया गया कवर अक्सर अधूरा साबित होता।
खर्च से सोचने का तरीका ज्यादा काम का
सिंगल इनकम फैमिली के लिए बेहतर है कि इनकम नहीं,खर्च से शुरुआत करें। अगर कल कमाई रुक जाए तो कौन-कौन से खर्च फिर भी चलते रहेंगे, जैसे घर का खर्च, बच्चों की स्कूल फीस,मेडिकल, ईएमआई, बीमा प्रीमियम। इसके बाद तय करें कि ये खर्च कितने साल तक कवर होने चाहिए। बच्चों की उम्र बढ़ेगी,लोन घटेगा,ज़रूरतें बदलेंगी- टर्म इंश्योरेंस हमेशा के लिए नहीं, सबसे नाज़ुक सालों के लिए होता है।
कम कवर लेने का खतरा
करियर की शुरुआत में लोग कम कवर लेकर टाल देते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने, बीमारी या लाइफस्टाइल बदलने पर ज्यादा कवर महंगा या नामुमकिन हो सकता है। सिंगल इनकम परिवार में यह जोखिम और भी बड़ा है क्योंकि संभालने के लिए दूसरी सैलरी नहीं होती। बहुत बड़ा कवर मतलब भारी प्रीमियम। अगर प्रीमियम बोझ लगने लगे,तो पॉलिसी लैप्स होने का खतरा रहता है। लक्ष्य सबसे बड़ा नंबर नहीं,बल्कि ऐसा कवर है जिसे बिना तनाव लंबे समय तक चलाया जा सके।
सही संतुलन कैसे बने?
कई परिवारों के लिए लेयर्ड अप्रोच बेहतर होती है, जैसे बेसिक खर्च और लोन के लिए मुख्य कवर,और पढ़ाई जैसे मिड-टर्म लक्ष्यों के लिए अतिरिक्त कवर। ज़िंदगी बदले तो कवर की समीक्षा भी ज़रूरी है। टर्म इंश्योरेंस डर की नहीं, ज़िम्मेदारी की बात है। सिंगल इनकम परिवार के लिए सही कवर वही है,जो मुश्किल वक्त में परिवार को आर्थिक झटके से बचा सके और संभलने का समय दे।
(प्रियंका कुमारी)
