india us trade deal: ट्रेड डील की खुशी में चमके सोना-चांदी, 10% तक उछले; निवेशकों के लिए आगे क्या?

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में तेजी आई।
india us trade deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ऐलान के बाद सर्राफा बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। 3 फरवरी को सोना और चांदी अपने हालिया निचले स्तर से करीब 10 फीसदी तक उछल गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और आंशिक सरकारी शटडाउन के बावजूद भारत में निवेशकों का भरोसा मजबूत दिखा।
मंगलवार दोपहर तक एमसीएक्स पर सोना 4.99 फीसदी की तेजी के साथ 150169 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं, चांदी ने ज्यादा चमक दिखाई और एमसीएक्स सिल्वर 9.2 फीसदी उछलकर 255126 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।
ईटीएफ में भी जोरदार रिकवरी
पिछले कुछ सत्रों से दबाव में रहे गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में भी दमदार वापसी देखने को मिली। एचडीएफसी सिल्वर ईटीएफ 10.79 फीसदी चढ़कर सबसे आगे रहा। मिराई एसेट सिल्वर ETF में 10.28 फीसदी और एसबीआई सिल्वर ईटीएफ में करीब 10 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। गोल्ड ईटीएफ भी पीछे नहीं रहे। एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ 5.82% चढ़ा, एक्सिस गोल्ड ईटीएफ में 5.6 फीसदी की मजबूती दिखी। कुल मिलाकर, सोने से जुड़े ETF में मिड सिंगल डिजिट की मजबूत बढ़त दर्ज की गई।
क्यों बढ़े दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत-अमेरिका ट्रेड डील से निवेशकों का भरोसा लौटा है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती भी देखने को मिली है। USD vs INR 90.20 के आसपास पहुंच गया, जो सेफ हेवन डिमांड को कुछ हद तक सीमित कर सकता। ऑगमॉन्ट की रिसर्च हेड रेनिशा चेनानी का कहना है कि मजबूत रुपया और ट्रेड डील से अस्थायी तौर पर घरेलू सोना-चांदी के दामों पर दबाव आ सकता है लेकिन लंबी अवधि में फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत हैं।
आगे क्या करें निवेशक?
मिराई एसेट की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालिया गिरावट और तेजी को बाजार का रीसेट माना जा रहा है, जो लंबे समय में सेहतमंद हो सकता है। निवेशकों को सोना-चांदी ईटीएफ को शॉर्ट टर्म ट्रेड की बजाय लॉन्ग टर्म पोर्टफोलियो का हिस्सा मानकर देखना चाहिए। ईटीएफ की कीमतों पर लिक्विडिटी और बिड-आस्क स्प्रेड का असर भी पड़ता है, जिससे अस्थायी तौर पर ज्यादा उतार-चढ़ाव दिख सकता है।
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि कुल निवेश का करीब 10 से 15 फीसदी हिस्सा सोना और चांदी में रखना संतुलित रणनीति मानी जाती।
(प्रियंका कुमारी)
