Flexi-cap vs multi-cap funds: दोनों म्यूचुअल फंड में क्या है अंतर? आपके लिए कौन सा बेहतर

Flexi-cap vs multi-cap funds: दोनों म्यूचुअल फंड में क्या है अंतर।
Flexi-cap vs multi-cap funds: शेयर बाजार में अगर आप कुछ समय से निवेश कर रहे हैं, तो एक बात साफ समझ आ जाती है कि हर साल एक ही कैटेगरी नहीं चमकती। कभी लार्ज कैप आगे रहते हैं, तो कभी मिड कैप कंपनियों के शेयर रफ्तार पकड़ते और स्मॉल कैप कई बार जबरदस्त रिटर्न देने के बाद अचानक फिसल भी जाते।
इसी उतार-चढ़ाव से बचने के लिए कई निवेशक ऐसे फंड चुनते हैं, जो सभी मार्केट कैप में निवेश करें। फ्लेक्सी कैप और मल्टीकैप फंड इसी सोच से बने हैं। नाम मिलते-जुलते हैं लेकिन इनका तरीका और जोखिम बिल्कुल अलग है।
मार्केट कैप में डाइवर्सिफिकेशन क्यों जरूरी?
पिछले कुछ सालों को देखें तो फर्क साफ दिखता है। 2025 में लार्ज कैप ने स्थिर रिटर्न दिए, मिड कैप सुस्त रहे और स्मॉल कैप दबाव में दिखे। वहीं, कुछ साल पहले स्मॉल कैप ने बाकी दोनों को पीछे छोड़ दिया था। कौन सा सेगमेंट कब आगे रहेगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल। ऐसे में तीनों में निवेश जोखिम को संतुलित करता और लंबी अवधि में बेहतर अनुभव देता है।
फ्लेक्सी कैप फंड क्या करता ?
फ्लेक्सी कैप फंड में कम से कम 65% पैसा इक्विटी में होना जरूरी है लेकिन लार्ज, मिड और स्मॉल कैप के बीच कोई तय सीमा नहीं होती। फंड मैनेजर को पूरी आजादी होती है। अगर उसे लगे कि लार्ज कैप सुरक्षित और सस्ते हैं, तो वहां ज्यादा निवेश हो सकता। अगर मिड या स्मॉल कैप आकर्षक लगें, तो वजन उधर बढ़ सकता। यानी यहां आप फंड मैनेजर की समझ और टाइमिंग पर भरोसा करते हैं।
Multi-cap फंड कैसे अलग?
मल्टी-कैप फंड के नियम सख्त होते हैं। इसमें कम से कम 75% निवेश इक्विटी में और उसमें भी हर हाल में 25-25% लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में रखना जरूरी है। इसका फायदा यह है कि हर समय संतुलन बना रहता। लेकिन नुकसान यह कि अगर स्मॉल कैप बहुत महंगे या जोखिम भरे हों, तब भी फंड वहां से पूरी तरह निकल नहीं सकता।
असली फर्क निवेश में कैसे दिखता?
फ्लेक्सी कैप फंड तेजी या बुलबुले वाले दौर में जोखिम कम कर सकता है लेकिन गलत कॉल होने पर रिटर्न पिछड़ भी सकते हैं। मल्टी कैप फंड में उतार-चढ़ाव ज्यादा महसूस हो सकता है। खासकर स्मॉल कैप गिरावट के समय, क्योंकि एक्सपोजर घटाया नहीं जा सकता।
कई बार मल्टी कैप फंड्स के औसत रिटर्न बेहतर दिखते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे हमेशा बेहतर होंगे। असल फर्क फंड मैनेजमेंट और आपकी जोखिम सहने की क्षमता तय करती है।
आपके लिए कौन सही?
अगर आप फंड मैनेजर के फैसलों पर भरोसा करते हैं और उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, तो फ्लेक्सी कैप आपके लिए ठीक है। अगर आप हर समय संतुलित निवेश चाहते हैं और नियम आधारित ढांचा पसंद करते हैं, तो मल्टी-कैप बेहतर रहेगा। इन दोनों फंड में मुकाबला नहीं, सोच का फर्क है। सही चुनाव वही है, जो आपकी जोखिम क्षमता और निवेश धैर्य से मेल खाए।
(प्रियंका कुमारी)
(Disclaimer: ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के आधार पर है। हरिभूमि इसकी पुष्टि नहीं करता है। शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश के लिए अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें)
