पीएफ से पैसा निकालना आसान: आप कब पूरा पैसा निकाल सकते? टैक्स से बचना है तो क्या करना होगा?

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EPFO Withdrawals: आप कब ईपीएफओ से पैसा निकाल सकते।  

EPFO Withdrawals: पीएफ निकासी नियम आसान हुए लेकिन रिटायरमेंट की सोच जरूरी। 5 साल की सेवा टैक्स-फ्री निकासी की सबसे बड़ी शर्त।

EPFO Withdrawals: कर्मचारियों के भविष्य निधि संगठन ने पीएफ से पैसा निकालने से जुड़े नियमों को काफी हद तक आसान कर दिया। पहले जहां निकासी के लिए 13 अलग-अलग कैटेगरी थीं,अब उन्हें सिर्फ 3 हिस्सों में बांटा गया है- ज़रूरी जरूरतें,घर से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां। मकसद साफ है कि नियमों को समझना आसान बनाना। लेकिन खतरा भी उतना ही बड़ा है कि आसान पहुंच लोगों को बिना सोचे-समझे पैसा निकालने के लिए उकसा सकती।

असल में पीएफ एक रिटायरमेंट फंड है। इसकी बुनियाद यही है कि पैसा लंबे समय तक जमा रहे और कंपाउंडिंग के जरिए बढ़ता जाए। निकासी की सुविधा है लेकिन तय हालात में ही।

कब पूरा EPF निकाल सकते?

58 साल की उम्र के बाद, यानी रिटायरमेंट पर आप पूरा पीएफ निकाल सकते हैं। इसके अलावा स्वैच्छिक रिटायरमेंट,स्थायी दिव्यांगता या विदेश में स्थायी रूप से बसने की स्थिति में भी पूरी राशि निकालने की अनुमति है। ऐसे मामलों में ईपीएफ खाते को स्वाभाविक रूप से बंद माना जाता है।

बेरोज़गारी में भी पूरा ईपीएफ निकाला जा सकता है लेकिन चरणों में। नौकरी छूटने के बाद तुरंत 75 फीसदी तक राशि निकाली जा सकती है। अगर 12 महीने तक नौकरी नहीं मिलती, तो बाकी 25% भी निकाला जा सकता। मकसद यह है कि तत्काल मदद मिले लेकिन रिटायरमेंट की पूरी पूंजी एक झटके में खत्म न हो। कुछ खास हालात जैसे कंपनी बंद होना,श्रम कानूनों के तहत रिट्रेंचमेंट या EPF कवर वाले संस्थान में दोबारा नौकरी न करना,इनमें भी पूरी निकासी संभव है।

ज़िंदगी की जरूरतों के लिए आंशिक निकासी

ईपीएफओ मानता है कि खर्चे रिटायरमेंट का इंतजार नहीं करते। इसलिए कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी की इजाजत है। घर खरीदने या बनाने के लिए 5 साल की नौकरी के बाद पीएफ का 90% तक निकाला जा सकता है। होम लोन चुकाने के लिए 10 साल और घर की मरम्मत के लिए 5 साल की सेवा जरूरी है। मरम्मत के लिए निकासी जीवन में दो बार की जा सकती है।

मेडिकल इमरजेंसी में सबसे ज्यादा राहत है। इसमें कोई न्यूनतम सेवा अवधि नहीं है। खुद,पति-पत्नी,माता-पिता या बच्चों के इलाज के लिए 6 महीने की सैलरी या अपने योगदान तक की राशि निकाली जा सकती है। शादी और पढ़ाई के लिए 7 साल की नौकरी के बाद अपने योगदान का 50% तक निकाला जा सकता है। 54 साल की उम्र के बाद या रिटायरमेंट से एक साल पहले, 90% तक प्री-रिटायरमेंट निकासी भी संभव है।

टैक्स का असर: जहां सबसे ज्यादा गलती होती है

EPF टैक्स का सबसे अहम आंकड़ा है- 5 साल। अगर आपने 5 साल की लगातार सेवा पूरी कर ली है, तो ज्यादातर मामलों में निकासी पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। 5 साल से पहले निकासी पर 30 हजार से ज्यादा रकम पर टीडीएस कटता है। पैनकार्ड होने पर 10%, पैन न होने पर ज्यादा दर से। अगर आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो Form 15G या 15H देकर TDS से बचा जा सकता है। लेकिन सबसे बड़ी कीमत टैक्स नहीं, बल्कि टूटी हुई कंपाउंडिंग है। EPF अभी 8% से ज्यादा रिटर्न देता है। जल्दी निकासी इस लंबे फायदे को तोड़ देती है।

सहारा है, शॉर्टकट नहीं

2025 के बदलावों ने EPF को ज्यादा मानवीय बनाया है। लेकिन यह मुफ्त पैसा नहीं है। हर निकासी आज की परेशानी सुलझाती है लेकिन कल की सुरक्षा से उधार लेती है। समझदारी से इस्तेमाल करें, तभी EPF आपका सच्चा सहारा बनेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: नौकरी बदलते समय EPF निकालना बेहतर है या ट्रांसफर करना?

जवाब: ट्रांसफर करना हमेशा बेहतर होता है। इससे टैक्स बेनिफिट्स मिलते हैं, सर्विस जारी रहती और कंपाउंडिंग बनी रहती।

सवाल: क्या बेरोज़गारी से पैसे निकालने पर भविष्य के EPF कंट्रीब्यूशन पर असर पड़ता है?

जवाब: नहीं। एक बार जब आप EPF-कवर्ड एम्प्लॉयर से जुड़ जाते हैं, तो कंट्रीब्यूशन नॉर्मली फिर से शुरू हो जाते हैं, लेकिन निकाली गई रकम वापस नहीं मिल सकती।

सवाल: क्या मैं पांच साल से पहले पैसे निकालने पर टैक्स से बच सकता हूं?

जवाब: सिर्फ खास मामलों में जैसे डिसेबिलिटी, बिज़नेस बंद होना या अगर एलिजिबल हों तो फॉर्म 15G/15H जमा करके। नहीं तो, टैक्स और TDS लागू होंगे।

(प्रियंका कुमारी)

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