Economic Survey: आर्थिक सर्वे पेश, FY26 में 7.4% जीडीपी का अनुमान पर चेतावनी भी, जान लें 10 बड़ी बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से पहले संसद में इकोनॉमिक सर्वे पेश किया।
Economic Survey 2025-26: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में देश का इकोनॉमिक सर्वे (आर्थिक सर्वेक्षण) 2025-26 पेश कर दिया। इस रिपोर्ट में पिछले एक साल के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था का पूरा लेखा-जोखा रखा गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंथा नागेश्वरन द्वारा तैयार इस सर्वे में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और दबावों के बावजूद भारत ने न सिर्फ खुद को संभाला है, बल्कि तेज़ रफ्तार से आगे भी बढ़ा है।
घरेलू मांग, निवेश और खपत के दम पर अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। हालांकि रिपोर्ट भविष्य के कुछ बड़े जोखिमों की ओर भी इशारा करती है।
VIDEO | Delhi: Union Finance Minister Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) tables Economic Survey 2025-26 in Lok Sabha.
— Press Trust of India (@PTI_News) January 29, 2026
(Source: Third Party)#EconomicSurvey pic.twitter.com/xxedux0Ewd
आइए जानते हैं सर्वे की 10 बड़ी बातें
1 दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक विकास दर 7.4% रहने का अनुमान है। यह लगातार चौथा साल होगा जब भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनेगा।
2 घरेलू मांग बनी ग्रोथ की रीढ़
निजी खपत जीडीपी के 61.5% तक पहुंच गई, जो पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा है। यह दिखाता है कि रिकवरी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीन पर भी दिख रही।
3 निवेश चक्र में तेज़ी
ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन जीडीपी का 30% हो चुका। सरकारी कैपेक्स रिकॉर्ड स्तर पर है और प्राइवेट निवेश भी वापसी करता दिख रहा।
4 महंगाई में बड़ी गिरावट
अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान सीपीआई महंगाई घटकर 1.7% पर आ गई, जिसमें खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट और सप्लाई बेहतर होने की बड़ी भूमिका रही।
5 ग्रोथ के साथ फिस्कल कंट्रोल
राजकोषीय घाटा FY21 के 9.2% से घटकर वित्तीय वर्ष 2025 में 4.8% पर आ गया है। FY26 में इसे 4.4% तक लाने का लक्ष्य तय है।
6 रुपया कमजोर लेकिन वजह घरेलू नहीं
रुपया डॉलर के मुकाबले 6.5% कमजोर हुआ है लेकिन सर्वे के मुताबिक इसकी वजह जियो पॉलिटिकल हालात और ग्लोबल कैपिटल फ्लो है, न कि भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी।
7 बाहरी मोर्चे पर मजबूती
करंट अकाउंट डेफिसिट सिर्फ 0.8% है और विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने के आयात को कवर करने लायक है।
8 रोजगार की स्थिति बेहतर
बेरोजगारी दर घटकर 4.9% हो गई। लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट बढ़ रहा है और औपचारिक रोजगार का दायरा भी फैल रहा।
9 गरीबी में गिरावट
वर्ल्ड बैंक की नई गरीबी रेखा के मुताबिक अत्यधिक गरीबी घटकर 5.3% रह गई है, जबकि लोअर मिडिल इनकम गरीबी 23.9% है।
10 सर्वे में चेतावनी भी
सर्वे ने आगाह किया है कि दुनिया एक नाजुक दौर में प्रवेश कर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ वॉर, एआई में भारी निवेश और पूंजी प्रवाह में बदलाव अचानक बड़े झटके दे सकते हैं।
इकोनॉमिक सर्वे साफ संकेत देता है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर खड़ी है लेकिन बदलते वैश्विक हालातों में सतर्क रहना भी जरूरी है।
(प्रियंका कुमारी)
