1 फरवरी से बदल जाएगा सिगरेट कंपनियों के मुनाफे का गणित, नई एक्साइज ड्यूटी का सिगरेट कंपनियों पर दिखेगा दबाव

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1 फरवरी 2026 से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू होने जा रही है। इसका सीधा असर ITC, VST Industries और Godfrey Phillips जैसी कंपनियों के मुनाफे और शेयरों पर पड़ेगा।

1 फरवरी 2026 से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू होने जा रही है। इसका सीधा असर ITC, VST Industries और Godfrey Phillips जैसी कंपनियों के मुनाफे और शेयरों पर पड़ेगा। जानिए नई ड्यूटी से सिगरेट कारोबार का गणित कैसे बदलेगा।

नई दिल्ली। भारत में सिगरेट का कारोबार लंबे समय से विवाद और मुनाफे, दोनों का केंद्र रहा है। एक तरफ सरकार इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते हुए भारी टैक्स लगाती है, तो दूसरी तरफ सिगरेट की मांग लगातार बनी हुई है और इससे सरकार को अच्छी आय होती है। एक अनुमान के अनुसार देश में करीब 12 करोड़ लोग सिगरेट का सेवन करते हैं। अब जब सरकार 1 फरवरी 2026 से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू करने जा रही है, तो इसका सीधा असर भारत की प्रमुख सिगरेट कंपनियों के कारोबार, मुनाफे और शेयर बाजार में उनकी स्थिति पर पड़ना तय माना जा रहा है। भारत में सिगरेट कारोबार पर सबसे ज्यादा दबदबा आईटीसी का है। यह न सिर्फ देश की सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी है, बल्कि एफएमसीजी, होटल, पेपर और एग्री बिजनेस में भी सक्रिय है। इसका बाजार के लगभग 70% भाग पर दबदबा है।

गोल्ड फ्लेक, क्लासिक, विल्स नेवी कट और इंडिया किंग्स जैसे ब्रांड आईटीसी को बाजार में मजबूत स्थिति देते हैं। नई एक्साइज ड्यूटी के बाद आईटीसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती कीमतों में बढ़ोतरी को संतुलित करना होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाकर टैक्स का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती है, लेकिन इससे सिगरेट की मांग पर कुछ असर पड़ सकता है। हालांकि, आईटीसी का विविध कारोबार उसे अन्य कंपनियों के मुकाबले बेहतर सुरक्षा देता है। देश की दूसरी बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी वीएसटी इंडस्ट्रीज भी नई टैक्स व्यवस्था से प्रभावित होगी। टोटल, चारम्स और चारमीनार जैसे ब्रांड्स मुख्य रूप से मिडिल और लोअर प्राइस सेगमेंट में बिकते हैं।

ऐसे में एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से इस कंपनी के ग्राहकों पर सीधा असर पड़ेगा। कीमतें बढ़ने की स्थिति में उपभोक्ता या तो खपत कम कर सकते हैं या सस्ते, अवैध विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे वीएसटी के वॉल्यूम पर दबाव बन सकता है। गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया, जो मार्लबोरो, फोर स्क्वेयर और रेड एंड व्हाइट जैसे ब्रांड बनाती है, पहले से ही प्रीमियम और मिड-सेगमेंट पर निर्भर है। नई एक्साइज ड्यूटी के बाद प्रीमियम सिगरेट और महंगी हो जाएंगी। इससे शहरी बाजार में मांग पूरी तरह खत्म तो नहीं होगी, लेकिन बिक्री की रफ्तार जरूर धीमी पड़ सकती है। हाल के महीनों में इसके शेयरों में उतार-चढ़ाव इसी आशंका को दर्शाता है कि टैक्स बढ़ोतरी मुनाफे को सीमित कर सकती है।

इसके अलावा गोल्डन टोबैको और एनटीसी इंडस्ट्रीज जैसी छोटी कंपनियों पर नई ड्यूटी का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। इन कंपनियों के पास न तो आईटीसी जैसा विविध कारोबार है और न ही कीमतें बढ़ाने की उतनी गुंजाइश। टैक्स बढ़ने से इनका मार्जिन घट सकता है और प्रतिस्पर्धा में टिके रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कुल मिलाकर, 1 फरवरी 2026 से लागू होने वाली नई एक्साइज ड्यूटी का मकसद तंबाकू खपत को हतोत्साहित करना और सरकारी राजस्व बढ़ाना है। लेकिन कारोबारी नजरिए से देखें तो इससे सिगरेट कंपनियों की लागत बढ़ेगी, कीमतें चढ़ेंगी और अवैध सिगरेट के बाजार को बढ़ावा मिलने का खतरा भी रहेगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ये कंपनियां कीमत, वॉल्यूम और मुनाफे के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं और निवेशक इस बदलते माहौल में कितना भरोसा दिखाते हैं।

ये हैं देश में सिगरेट बनाने वाली प्रमुख कंपनियां

1. आईटीसी

ITC देश की सबसे बड़ी सिगरेट कंपनी है। आईटीसी कंपनी का इतिहास काफी पुराना है। कंपनी की नींव 1910 में रखी गई थी। तब कंपनी का नाम इंपीरियल टोबैको कंपनी आफ इंडिया लिमिटेड था। साल 1970 में कंपनी का नाम बदल कर इंडिया टोबैको कंपनी लिमिटेड कर दिया गया। उसके बाद 1974 में आईटीसी नाम पर मुहर लगी। मार्केट कैप के हिसाब से यह कंपनी देश की टॉप-15 कंपनियों में शामिल की जाती है। आईटीसी के कई सिगरेट ब्रांड्स हैं, जिनके नाम इनसिग्निया, इंडिया किंग्स, क्लासिक, गोल्ड फ्लेक, अमेरिकन क्लब, विल्स नेवी कट,प्लेयर्स, कैप्स्टन, बर्कले, ब्रिस्टल,फ्लेक, सिल्क कट, ड्यूक एंड रायल हैं। यह कंपनी के सिगरेट एक्सपोर्ट भी करती है।

2. वीएसटी इंडस्ट्रीज

देश की दूसरी सबसे बड़ी सिगरेट बनाने वाली कंपनी वीएसटी इंडस्ट्रीज है। इस कंपनी की शुरुआत 1930 में वजीर सुल्तान ने की थी। वीएसटी का पूरा नाम वजीर सुल्तान टोबैको कंपनी लिमिटेड है। इस कंपनी का मुख्य कार्यालय हैदराबाद में है। इस कंपनी के सिगरेट टोटल, चार्म्स, चारमीनार, एडीशन और गोल्ड नाम से बिकते हैं।

3. गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया

गॉडफ्रे फिलिप्स कंपनी की शुरुआत एक अंग्रेज कारोबारी गॉडफ्रे फिलिप्स ने लंदन में की थी। साल 1936 में इस कंपनी ने भारत में कदम रखा था, जो तंबाकू का उत्पादन करती थी। 1968 में यह कंपनी बिक गई। इस कंपनी से मालित ललित मोदी हैं, फिलहाल ललित मोदी लंदन में हैं। उन पर भगोड़ा का टैग लगा है। इस कंपनी के कई ब्रांड बेहद मशहूर हैं। आप भले ही सिगरेट नहीं पीते हों, लेकिन नाम जरूर सुना होगा। यह कंपनी मार्लबोरो, फोर स्क्वेयर, कैवेंडर्स, रेड एंड ह्वाइट, स्टेलर, नार्थ पोल एंड टिपर और पान विलास जैसी प्रोडक्ट्स बनाती हैं।

4. गोल्डन टोबैको कंपनी लिमिटेड

डालमियां समूह भी सिगरेट कारोबार में है। वह गोल्डन टोबैको लिमिटेड नाम की कंपनी सिरगेट बनाती है। ये कंपनी का सबसे लोकप्रिय प्रोडक्ट ब्लैक है, इसके अलावा और भी प्रोडक्ट बनाती है जैसे पनामा, चांसलर, गोल्डेन्स गोल्ड फ्लेक, स्टाइल। कंपनी सिगार भी बनाती है।

5. एनटीसी

इनके अलावा, एनटीसी इंडस्ट्रीज भी काफी समय से सिरगेट बनाती है। इस कंपनी की 1931 में कोलकाता में शुरुआत हुई थी। इसके ब्रांड्स है मेपोल, कार्लटन, जयपुर मेंथाल, प्रिंस हेनरी और नंबर-10 हैं।

(एपी सिंह की रिपोर्ट)

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