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अब ट्रेनें नहीं होंगी लेट, रेलवे ने उठाया ये बड़ा कदम

रेलवे ट्रेनों के इंजन को सैटेलाइट से लिंक करेगा। इसका मकसद ट्रेनों के वास्तवितक समय की निगरानी करना है।

अब ट्रेनें नहीं होंगी लेट, रेलवे ने उठाया ये बड़ा कदम
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रेलवे ट्रेनों के इंजन को सैटेलाइट से लिंक करेगा। इसका मकसद ट्रेनों के वास्तवितक समय की निगरानी करना है। इस परियोजना को पूरा करने के लिए रेलवे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) की मदद ले रहा है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस टेक्नोलॉजी से ट्रेनों को ट्रैक करने और उनमें मौजूद क्रू से बात करने में आसानी होगी।

10 इंजनों में हो चुका है ट्रायल

साल के अंत तक सभी 10,800 इंजन में एंटीना फिक्स करने का टारगेट रखा गया है। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ सदस्य के मुताबिक, इन ट्रेनों की निगरानी सीधे ड्राइवर केबिन से होगी। अभी 10 इंजनों में इसका ट्रायल हो चुका है और दिसंबर 2018 तक इस सिस्टम को सभी इंजनों में लगा दिया जाएगा।

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कई ट्रेनों में लगाए आईसी चिप

मानवरहित क्रॉसिंग पर दुर्घटना रोकने रेलवे इसरो के साथ एक पायलट परियोजना पर भी काम कर रहा है। रेलवे ने कई ट्रेन के इंजनों में इसरो के बनाए हुए आईसी चिप लगा दिए हैं, जिसे ‘नाविक’सैटेलाइट सिस्टम से जोड़ा गया है। रेलवे मानवरहित क्रॉसिंग पर एक अलर्ट सिस्टम लगाएगा। सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए ट्रेनों के आते समय एक तेज हूटर बजेगा, जिससे क्रॉसिंग पार करने वालों को अलर्ट किया जा सकेगा।

सभी ट्रेनों में होंगे 22 कोच

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया, रेलवे के अद्यतन करने की योजना के तहत सभी ट्रेनों में 22 कोच लगाए जाएंगे। ट्रेनों की लंबाई के साथ-साथ प्लेटफॉर्म को भी अपग्रेड किया जाएगा। इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट इन्हें लंबा और जरूरी बदलाव करने पर विचार कर रहा है।

सभी ट्रेनों में होगी एक जैसी कोच संख्या

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सभी ट्रेनों में कोच की संख्या एक जैसी होने पर इन्हें कहीं से भी चलाया जा सकेगा। इससे मेंटेनेंस के लिए इंतजार नहीं करना होगा और लोगों का सफर जल्दी पूरा हो सकेगा। वहीं, रेलवे अफसर के मुताबिक, योजना के पहले फेज के लिए 300 ट्रेन को चिन्हित किया गया है। जुलाई में आने वाले टाइम टेबल में इनकी संख्या और रूट तय कर दिए जाएंगे।

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मौजूदा समय में दो तरह के कोच

एक सीनियर रेलवे अफसर ने बताया कि मौजूदा वक्त में दो तरह (आईसीएफ और एलएचबी) के कोच इस्तेमाल हो रहे हैं। जरूरत के मुताबिक, अलग-अलग ट्रेनों में इनकी संख्या 12, 16, 18, 22 और 26 हो सकती है।

ऐसे में, किसी ट्रेन के लेट होने की स्थिति में रेलवे इसकी जगह दूसरी ट्रेन का इस्तेमाल नहीं कर पाता है और ट्रेन के मेंटेनेंस होने तक इंतजार करना पड़ता है। अगर सभी ट्रेनों में कोच की संख्या एक जैसी हो तो रेलवे किसी भी ट्रेन को कहीं से भी चला पाएगा। देरी से आई ट्रेन के मेंटेनेंस के लिए रुकना नहीं होगा।

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