Auto Trends: क्या होता है टर्बोचार्ज्ड इंजन और यह कैसे काम करता है? जानें पूर डिटेल

टर्बोचार्ज्ड इंजन कैसे काम करता है
Auto Trends: आज के समय में टर्बोचार्ज्ड इंजन (Turbocharged Engine) कार इंडस्ट्री का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। टर्बोचार्ज्ड इंजन का मुख्य मकसद छोटे इंजन से ज्यादा पावर निकालना होता है। यह इंजन के अंदर सामान्य से अधिक हवा भेजता है, जिससे ज्यादा ईंधन जल पाता है और बिना इंजन का साइज बढ़ाए ज्यादा ताकत पैदा होती है।
नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन कैसे काम करता है?
नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन हवा को अपने आप सिलेंडर में खींचता है। हवा और ईंधन का मिश्रण बनाकर उसे जलाया जाता है, जिससे पावर पैदा होती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में हवा खींचने की एक सीमा होती है। इसी सीमा को पार करने के लिए टर्बोचार्जर की जरूरत पड़ती है।
टर्बोचार्जर कैसे काम करता है?
टर्बोचार्जर इंजन से निकलने वाली एग्जॉस्ट गैस की बेकार जाने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। जब गरम एग्जॉस्ट गैस बाहर निकलती है, तो वह टर्बाइन को घुमाती है। यह टर्बाइन एक शाफ्ट के जरिए कंप्रेसर से जुड़ी होती है, जो ताजी हवा को दबाव के साथ इंजन में भेजता है।
ज्यादा पावर कैसे मिलती है?
दबाव वाली हवा में ज्यादा ऑक्सीजन होती है। ज्यादा ऑक्सीजन मिलने पर इंजन ज्यादा ईंधन जलाता है, जिससे दहन प्रक्रिया ज्यादा शक्तिशाली हो जाती है और इंजन ज्यादा पावर पैदा करता है।
इंटरकूलर की भूमिका
हवा को दबाने पर वह गरम हो जाती है। इंटरकूलर इस हवा को ठंडा करता है, जिससे हवा ज्यादा घनी बनती है और इंजन की परफॉर्मेंस व एफिशिएंसी बेहतर होती है।
टर्बोचार्ज्ड इंजन के फायदे और नुकसान
फायदे: छोटे इंजन से ज्यादा पावर, बेहतर एक्सीलरेशन और ओवरटेकिंग, बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी और कम उत्सर्जन।
नुकसान: टर्बो लैग (पावर आने में देरी), मेंटेनेंस और रिपेयर थोड़ा महंगा।
टर्बो इंजन किसके लिए सही है?
अगर आप बेहतर परफॉर्मेंस, आधुनिक टेक्नोलॉजी और छोटे लेकिन ताकतवर इंजन की तलाश में हैं, तो टर्बोचार्ज्ड इंजन वाली कार आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है।
(मंजू कुमारी)
