Crash Test: नई टाटा पंच फेसलिफ्ट का रियल-वर्ल्ड क्रैश टेस्ट, फिर साबित हुई सेफ्टी की ताकत

टाटा पंच फेसलिफ्ट का रियल-वर्ल्ड क्रैश टेस्ट
Crash Test: नई टाटा पंच फेसलिफ्ट (Tata Punch Facelift) ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सेफ्टी के मामले में यह कार अपने सेगमेंट में बेंचमार्क क्यों मानी जाती है। इस बार टाटा मोटर्स ने केवल लैब बेस्ड क्रैश टेस्ट तक सीमित न रहते हुए, एक रियल-वर्ल्ड क्रैश डेमॉन्स्ट्रेशन भी किया, जिसमें नई पंच को जानबूझकर एक खड़े ट्रक से टकराया गया।
रियल-वर्ल्ड क्रैश टेस्ट में क्या हुआ?
इस डेमॉन्स्ट्रेशन में नई Tata Punch को स्पीड पर एक स्टेशनरी ट्रक से टकराया गया। यह वही तरह की दुर्घटना है, जो भारतीय सड़कों पर अक्सर देखने को मिलती है। टक्कर के बाद सामने आए नतीजों ने टाटा की सेफ्टी इंजीनियरिंग को साफ तौर पर साबित किया। क्रैश के बाद पैसेंजर केबिन पूरी तरह सुरक्षित रहा और केबिन में किसी भी तरह की घुसपैठ (Intrusion) नहीं हुई। सभी दरवाजे आसानी से खोले जा सके, जो स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी का अहम संकेत है। इसके अलावा, रेस्ट्रेंट सिस्टम्स ने भी सही तरीके से काम किया।
अंडररन प्रोटेक्शन वाले ट्रक का इस्तेमाल
इस क्रैश टेस्ट की एक खास बात यह रही कि जिस ट्रक से टक्कर कराई गई, उसमें सही अंडररन प्रोटेक्शन बार लगा हुआ था। भारत में कई ट्रकों में यह सेफ्टी फीचर नहीं होता, जिससे हादसों में नुकसान बढ़ जाता है। टाटा मोटर्स ने यह दिखाया कि जब सभी रोड यूजर्स सेफ्टी नॉर्म्स का पालन करते हैं, तो गाड़ियों की सेफ्टी टेक्नोलॉजी कितनी प्रभावी साबित होती है।
नई Punch का सेफ्टी DNA
नई टाटा पंच फेसलिफ्ट में हाई-स्ट्रेंथ बॉडी स्ट्रक्चर, स्टैंडर्ड 6 एयरबैग्स, ESP और कई एक्टिव व पैसिव सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं। Bharat NCAP की 5-स्टार रेटिंग इस बात की पुष्टि करती है कि ये फीचर्स सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि असल जिंदगी में भी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
क्रैश टेस्ट Video विवाद और कंपनी का जवाब
ट्रक क्रैश टेस्ट का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ सवाल उठे, खासकर ड्राइवर साइड डोर को लेकर। इस पर टाटा मोटर्स ने साफ किया कि टेस्ट में सिर्फ एक ही कार का इस्तेमाल हुआ था और भ्रम वीडियो एडिटिंग की गलती की वजह से पैदा हुआ। कंपनी के मुताबिक, दरवाजे और फेंडर पर दिखने वाला हल्का डैमेज क्रैश के बाद निरीक्षण के दौरान हुआ था।
टाटा मोटर्स ने स्पष्ट किया कि वीडियो में हुई एडिटिंग की गलती के बावजूद सेफ्टी से जुड़े मुख्य नतीजे बिल्कुल नहीं बदले। क्रैश के बाद केबिन सुरक्षित रहा, सभी दरवाजे काम करने की स्थिति में थे और स्ट्रक्चर में कोई गंभीर डिफॉर्मेशन नहीं हुआ। कंपनी ने कहा कि फोकस विजुअल कन्फ्यूजन पर नहीं, बल्कि कार की वास्तविक सेफ्टी परफॉर्मेंस पर होना चाहिए।
(मंजू कुमारी)
