22 March 2026 Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार, 22 मार्च 2026, रविवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो रात 9 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।
आज का योग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज रविवार को दोपहर बाद 3 बजकर 42 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। वैधृति योग को सावधानी से कार्य करने का समय माना जाता है, इसलिए इस अवधि में महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेना उचित रहता है। इसके बाद का समय अपेक्षाकृत शुभ माना जाएगा।
नक्षत्र
नक्षत्र की बात करें तो इस दिन भरणी नक्षत्र रात 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। भरणी नक्षत्र को ऊर्जा, परिवर्तन और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सफलता पाने के लिए धैर्य और संयम आवश्यक होता है।
शुभ मुहूर्त
यदि शुभ मुहूर्तों की बात करें तो दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होगी, जो सुबह 5 बजकर 6 मिनट से 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। यह समय ध्यान, साधना और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। इसके बाद प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। दिन के मध्य में अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगा, जिसे किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है। वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 47 मिनट से 3 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जो सफलता और विजय दिलाने वाला माना जाता है। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 49 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। यह समय विशेष रूप से पूजा और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ होता है। सायाह्न सन्ध्या 6 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 1 मिनट तक रहेगी, जबकि अमृत काल शाम 6 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जो अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
आज का राहुकाल
राहुकाल की बात करें तो विभिन्न शहरों में इसका समय अलग-अलग रहेगा। भोपाल में राहुकाल शाम 5 बजकर 1 मिनट से 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय सुबह 6 बजकर 22 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 33 मिनट पर। दिन की अवधि संतुलित रहेगी, जो पूजा-पाठ और अन्य कार्यों के लिए अनुकूल मानी जा सकती है।
कुल मिलाकर 22 मार्च 2026 का दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। नवरात्र का चौथा दिन, गणेश चतुर्थी व्रत, वैधृति योग और भरणी नक्षत्र का संयोग इसे विशेष बनाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-अर्चना करने से सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है।