14 April 2026 Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 अप्रैल 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज बैशाख माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है, जो रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।
योग
इस दिन योग की स्थिति भी अनुकूल बनी हुई है। शुक्ल योग दोपहर 3 बजकर 40 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है। इसके बाद अन्य योग प्रारंभ होगा। वहीं नक्षत्र की बात करें तो शतभिषा नक्षत्र शाम 4 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। यह नक्षत्र रहस्य, चिकित्सा और शोध से जुड़े कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
गोचर
14 अप्रैल को सूर्य का गोचर विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है। सूर्य का यह परिवर्तन नए सौर वर्ष की शुरुआत का संकेत देता है और इसे ऊर्जा, उत्साह तथा नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन त्रिपुष्कर योग का भी निर्माण हो रहा है, जो शाम 4 बजकर 6 मिनट से देर रात 12 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। यह योग अत्यंत शुभ माना जाता है और इस समय किए गए कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होता है।
पर्व
इसी दिन देश के विभिन्न हिस्सों में प्रमुख पर्व भी मनाए जाएंगे। बैसाखी का त्योहार विशेष रूप से उत्तर भारत, खासकर पंजाब में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह फसल कटाई और समृद्धि का प्रतीक है। इसके अलावा पना संक्रांति भी इस दिन मनाई जाएगी, जो ओडिशा और पूर्वी भारत में विशेष महत्व रखती है। यह दिन दान, स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्तों की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए सबसे उत्तम समय है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से 1 बजकर 4 मिनट तक रहेगा, जिसमें किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत की जा सकती है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 44 मिनट से 3 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जो सफलता प्राप्त करने के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 54 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
आज के दिन दिन पंचक भी विद्यमान रहेगा, इसलिए कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। पंचक के दौरान निर्माण कार्य, यात्रा या लकड़ी से जुड़े कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 45 मिनट पर होगा। दिनभर का समय धार्मिक गतिविधियों, दान-पुण्य और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल बना रहेगा।







