Trump Tariff Shock: डोभाल ने रूबियो को सुनाई थी खरी-खरी, विदेश मंत्री से कहा था- भारत झुकेगा नहीं, ट्रम्प के हटने का इंतजार करेंगे

Trump Tariff Shock: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर लगाए गए ट्रेड टैरिफ को 18 प्रतिशत तक सीमित करने की घोषणा कर दी है। इसके पीछे भारत का वह कड़ा रुख माना जा रहा है,

Updated On 2026-02-05 10:28:00 IST

Trump Tariff Shock: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर लगाए गए ट्रेड टैरिफ को 18 प्रतिशत तक सीमित करने की घोषणा कर दी है। इसके पीछे भारत का वह कड़ा रुख माना जा रहा है, जिसमें उसने राष्ट्रीय हितों से किसी भी तरह का समझौता करने से साफ इनकार कर दिया था। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दोनों देशों के रिश्तों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल एक अहम संदेश लेकर अमेरिका गए थे। वहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की थी। इस बातचीत में डोभाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि भारत राष्ट्रपति ट्रंप या उनके शीर्ष सहयोगियों की धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है। भारत पहले भी प्रतिकूल अमेरिकी सरकारों का सामना कर चुका है और जरूरत पड़ी तो वह मौजूदा राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने तक इंतजार कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक के बाद अमेरिका के साथ रिश्तों में आई तल्खी को कम करने के उद्देश्य से डोभाल को वॉशिंगटन भेजा था। इस दौरान डोभाल और रूबियो की बातचीत को बेहद स्पष्ट और सीधा बताया गया। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, डोभाल ने कहा था कि भारत रिश्ते सुधारना चाहता है, लेकिन यह भी चाहता है कि ट्रंप और उनके सहयोगी सार्वजनिक मंचों पर भारत की आलोचना न करें।

इस मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद तनाव कम होने के संकेत दिखने लगे। 16 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन कर उनके काम की तारीफ की। इसके बाद साल के अंत तक दोनों नेताओं के बीच टैरिफ कम करने को लेकर चार बार फोन पर बातचीत हुई। हालांकि सार्वजनिक तौर पर इस डील को लेकर कोई औपचारिक संकेत नहीं दिया गया था, इसलिए जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर समझौते की जानकारी साझा की तो भारत के कई अधिकारी भी चौंक गए।

भारतीय रणनीतिक हलकों में माना गया कि डोभाल-रूबियो की बैठक अमेरिका के लिए यह संदेश थी कि भारत अमेरिका को दीर्घकालिक साझेदार मानता है, लेकिन वह अपने हितों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। साथ ही भारत यह भी जानता है कि चीन को संतुलित करने और 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अमेरिकी पूंजी, तकनीक और रक्षा सहयोग अहम भूमिका निभा सकता है।

दिसंबर में भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की नियुक्ति से भी रिश्तों में सुधार की उम्मीदें मजबूत हुईं। गोर व्हाइट हाउस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और ट्रंप व रूबियो दोनों के करीबी माने जाते हैं। अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में उन्होंने भारत-अमेरिका के मतभेदों को “असली दोस्तों के बीच की असहमति” बताया था।

हालांकि संबंधों में सुधार के संकेत मिलने के बावजूद भारत ट्रंप प्रशासन के साथ बेहद संतुलित और सावधानीपूर्ण रवैया अपनाए हुए है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है और इसी नीति के तहत उसने अमेरिका के अलावा अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ भी रिश्ते मजबूत किए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की चीन में शी जिनपिंग और पुतिन के साथ मुलाकात और दोनों नेताओं के साथ वायरल हुई तस्वीरों को भी अमेरिका के लिए एक कूटनीतिक संकेत माना गया। दिसंबर में पुतिन का भव्य स्वागत और हाल ही में यूरोपीय यूनियन के साथ लगभग दो दशकों बाद हुआ मुक्त व्यापार समझौता यह दिखाता है कि भारत अपने व्यापारिक और रणनीतिक विकल्पों को लगातार विस्तार दे रहा है।

ब्रिटेन के साथ समझौते के बाद ईयू डील और आने वाले दिनों में कनाडा व ब्राजील के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों से यह साफ हो गया है कि भारत वैश्विक मंच पर संतुलित, आत्मविश्वासी और बहुआयामी कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

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