महादेव सट्टा घोटाला: प्रमोटर और साथियों के 92 करोड़ की संपत्ति ईडी ने की अटैच

महादेव सट्टा एप तथा स्काय एक्सचेंज के नाम से सट्टा संचालन करने वाले प्रमोटरों की ईडी ने 91.82 करोड़ रुपए की चल-अलच संपत्ति अटैच की है।

Updated On 2026-01-08 13:26:00 IST

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रायपुर। महादेव सट्टा एप तथा स्काय एक्सचेंज के नाम से सट्टा संचालन करने वाले प्रमोटरों की ईडी ने 91.82 करोड़ रुपए की चल-अलच संपत्ति अटैच की है। इस कार्रवाई में ईडी ने मिस परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट एलएलसी और मेसर्स एक्जिम जनरल ट्रेडिंग-जीजेडसीओ के नाम पर रखे गए कुल 74 करोड़ 28 लाख 87 हजार 483 रुपए के बैंक बैलेंस को अटैच किया है। ये संस्थाएं सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया की हैं।

ईडी ने सौरभ चंद्राकर तथा उससे जुड़े जिन लोगों की 74 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति अटैच की है, उन लोगों ने सट्टा से कमाई रकम को व्हाइट करने हरि शंकर टिबरेवाल की कंपनी में स्काय एक्सचेंज निवेश किया था। इसके अलावा ईडी ने सौरभ चंद्राकर के सहयोगी गगन गुप्ता की 17.5 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है। अटैच की गई संपत्तियों में गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर रखी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स शामिल हैं, जिन्हें कैश में खरीदा गया था।

इन एफपीआईएस में निवेश
ईडी ने अपनी जांच में एक जटिल कैश बैक स्कीम के बारे में जानकारी जुटाई है। सट्टे की कमाई को जिन भारतीय एफपीआईएस कंपनियों में निवेश कर रकम की अदला-बदली करते थे, उन्हें इन्वेस्टमेंट का 30 से 40 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। महादेव सट्टा के प्रमोटरों ने गगन गुप्ता की सालासार टैक्नो इंजीनियरिंग, टाइगर लॉजिस्टिक में 98 करोड़ रुपए निवेश किया है। महादेव सट्टा एप मामले में ईडी ने अब तक देश के अलग-अलग राज्यों में 175 से ज्यादा ठिकानों में रेड कार्वाई की है। साथ ही 26 सौ करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति फ्रीज करने के साथ अटैच की है। पांच प्रॉसिक्यूशन शिकायतों में 74 कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।

वेबसाइट ऐसा फायदा कम नुकसान ज्यादा
ईडी द्वारा जारी बयान के मुताबिक महादेव सट्टा एप की काली कमाई को महादेव सट्टा एप के प्रमोटर सौरभ तथा उसके साथियों ने बड़े पैमाने पर स्काय एक्सचेंज में निवेश किया। रकम निवेश करने बेनामी खातों बनाए गए। सट्टा संचालित करने महादेव के प्रमोटरों ने वेबसाइट, मोबाइल में कई एप्लिकेशन तैयार किए थे। वेबसाइटों को इस तरह से हेरफेर कर किया गया था कि सभी ग्राहकों को फायदा कम, नुकसान ज्यादा हो।

हजारों करोड़ों का फंड एकत्र कर बांटा गया
ईडी द्वारा जारी बयान के अनुसार सट्टा एप के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा किया गया और पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग तरीके से बांटा गया। इसके अलावा बैंक खाता खोलने के लिए जाली या चोरी किए गए केवायसी का भी इस्तेमाल किया गया और सट्टे की कमाई छिपाने के लिए लेयर किया गया। इन सभी लेनदेन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें टैक्स के दायरे में लाया गया। जांच में आगे पता चला कि इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से कमाए गए हजारों करोड़ों का फंड एकत्र कर बांटा गया ईडी द्वारा जारी बयान के अनुसार सट्टा एप के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा किया गया और पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग तरीके से बांटा गया। इसके अलावा बैंक खाता खोलने के लिए जाली या चोरी किए गए केवायसी का भी इस्तेमाल किया गया और सट्टे की कमाई छिपाने के लिए लेयर किया गया। इन सभी लेनदेन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें टैक्स के दायरे में लाया गया। जांच में आगे पता चला कि इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से कमाए गए।

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