रिटायर हुए पर टायर्ड नहीं: समाज कल्याण विभाग की नौकरी के बाद समाज सेवा को बनाया लक्ष्य, 56 बच्चों को दे रहे मुफ्त कोचिंग
गरियाबंद जिले के ग्राम जमाही निवासी दिव्यांग रामजी सिन्हा ने समाज कल्याण विभाग की नौकरी के बाद समाज सेवा को लक्ष्य बनाया। 56 बच्चों को मुफ्त कोचिंग दे रहे ।
रिटायर होने के बाद समाज सेवा कर रहे रामजी सिन्हा
गोरेलाल सिन्हा- गरियाबंद। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद शासन स्तर पर विकास को लेकर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन समाज के उत्थान में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो व्यक्तिगत संकल्प और सामाजिक दायित्व के भाव से बदलाव की मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायी शख्सियत हैं समाजसेवी रामजी सिन्हा, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद समाजसेवा को अपना लक्ष्य बना लिया है। जिले के फिंगेश्वर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम जमाही निवासी शारीरिक रूप से दिव्यांग रामजी सिन्हा, समाज कल्याण विभाग में सेवाकाल के दौरान ही समाज सेवा की भावना से प्रेरित हो गए थे।
मार्च 2018 में समाज कल्याण विभाग बेमेतरा से प्रभारी उप संचालक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने यह ठान लिया कि पिछड़े और ग्रामीण अंचल के बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करेंगे। रामजी सिन्हा बीते एक वर्ष से अधिक समय से ग्राम जमाही में स्वयं के खर्च से निःशुल्क कोचिंग एवं ट्यूशन क्लास संचालित कर रहे हैं। गांव के दो कमरों वाले सामुदायिक भवन को ग्रामीणों की सहमति से उपयोग में लेकर उन्होंने शिक्षा का ऐसा केंद्र बनाया है, जहां निर्धन, पिछड़े और अनुसूचित वर्ग के बच्चे बड़े सपने देख रहे हैं। यहां न केवल जमाही बल्कि फुलझर, छुईहा सहित आसपास के गांवों के बच्चे भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वर्तमान में कुल 56 छात्र-छात्राएं नियमित रूप से कक्षा में अध्ययन कर रहे हैं।
आईएएस-आईपीएस बनाने का सपना
रामजी सिन्हा का मानना है कि, जब उत्तर प्रदेश और बिहार के बच्चे कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बन सकते हैं, तो छत्तीसगढ़ के बच्चे क्यों नहीं। इसी उद्देश्य के साथ वे बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही मजबूत शैक्षणिक आधार देने में जुटे हैं। फिलहाल वे कक्षा 5वीं और 8वीं बोर्ड के विद्यार्थियों पर विशेष फोकस कर रहे हैं। स्कूल से छुट्टी के बाद प्रतिदिन शाम 5 बजे से 7 बजे तक नियमित कक्षाएं संचालित होती हैं।
अनुशासन, संस्कार और खेल का समन्वय
कक्षाओं की शुरुआत सरस्वती वंदना से होती है। इसके बाद सभी बच्चे एक स्वर में छत्तीसगढ़ का राजकीय गीत 'अरपा पैरी के धार का गायन करते हैं। हर रविवार को टेस्ट पेपर के माध्यम से बच्चों की बौद्धिक क्षमता का आंकलन किया जाता है। स्टेट स्तर की कबड्डी खिलाड़ी भावना साहू बच्चों को खेल प्रशिक्षण भी दे रही है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास हो सके। इस पहल का सबसे मार्मिक उदाहरण भेषमणि यादव, कक्षा 8वीं की छात्रा है, जो गरीबी के कारण 08 माह तक स्कूल छोड़ चुकी थी। रामजी सिन्हा ने न केवल उसे पुनः शिक्षा से जोड़ा, बल्कि उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं उठाते हुए पढ़ाई का संपूर्ण खर्च वहन कर रहे हैं। रामजी सिन्हा वर्ष 1978 में मध्यप्रदेश शासन में शासकीय स्टेट आर्टिस्ट भी रह चुके हैं। उन्होंने 22 वर्ष बाल संरक्षण (संप्रेक्षण) गृह, 5 वर्ष विशेष गृह, तथा निशक्तजन जनकल्याण विभाग दुर्ग में सहायक आयुक्त के पद पर सेवाएं दी हैं। सेवाकाल में उन्होंने समाज के वंचित और दुखियारे लोगों को बहुत करीब से देखा, जिसका प्रभाव आज उनके सेवा कार्य में स्पष्ट दिखता है। इस अभियान में उनके परिवार का भी पूर्ण सहयोग है, जो वर्तमान में दुर्ग में निवासरत है। कोचिंग संचालन में परदेशी राम सिन्हा, तथा तीन योग्य शिक्षिकाएं कुमारी दीपिका साहू, कुमारी सोनम दिवान और कुमारी मोनिका सिन्हा निःस्वार्थ सेवा दे रही हैं।